वंदेमातरम के दो टुकड़े न करते तो देश का विभाजन नहीं हुआ होता : अमित शाह

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नई दिल्ली। राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को दावा किया कि यदि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के दो टुकड़े न किए जाते तो देश का विभाजन भी नहीं होता। शाह ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष होने पर उच्च सदन में चर्चा में भाग लेते हुए उम्मीद जताई कि इस चर्चा के माध्यम से देश के बच्चे, युवा और आने वाली पीढ़ी यह बात समझ सकेंगे कि वंदे मातरम् का देश को स्वतंत्रता दिलाने में क्या योगदान रहा है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा में इस विषय पर कुछ लोगों ने यह प्रश्न उठाया था कि आज वंदे मातरम् पर चर्चा क्यों होनी चाहिए। शाह ने कहा कि यह अमर कृति भारत माता के प्रति समर्पण, भक्ति और कर्तव्य के भाव जागृत करने वाली कृति है। गृह मंत्री ने कहा कि जिन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि आज इस पर चर्चा क्यों की जा रही है, उन्हें अपनी समझ पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है।

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उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस चर्चा को पश्चिम बंगाल में होने जा रहे चुनाव से जोड़ कर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग राष्ट्रीय गीत के महिमामंडन को बंगाल चुनाव से जोकर कम करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब वंदे मातरम् की 1937 में स्वर्ण जयंती हुई तो जवाहरलाल नेहरू ने उसके दो टुकड़े कर उसे दो अंतरों तक सीमित करने का काम किया।

उन्होंने कहा कि इसी समय तुष्टिकरण की शुरुआत हुई जिसकी परिणति बाद में जाकर देश के विभाजन के रूप में हुई। शाह ने कहा, मेरे जैसेकई लोगों का मानना है, भले ही यह बात कांग्रेस को पसंद आए या नहीं आए, वंदे मातरम् के दो टुकड़े तुष्टिकरण की नीति के तहत नहीं किए जाते तो देश का बंटवारा नहीं होता । देश आज पूरा होता ।

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उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् लिखे जाने के जब 100 साल पूरे हुए तो उस समय देश में आपातकाल लगा दिया गया था और इसे बोलने वालों को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जेल में डाल दिया था। गृह मंत्री ने कहा कि जब वंदे मातरम् लिखे जाने के 150 वर्ष होने पर लोकसभा में चर्चा शुरू हुई तो जिस कांग्रेस के अधिवेशन की शुरुआत में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर राष्ट्रीय गीत स्वयं गाते थे, उसी कांग्रेस से जुड़े गांधी परिवार के दोनों सदस्य लोकसभा में इसकी चर्चा के दौरान नदारद थे।

उन्होंने कहा, वंदे मातरम् का विरोध जवाहरलाल नेहरू से लेकर आज के कांग्रेस के नेतृत्व तक, कांग्रेस के खून में बसा है। शाह ने प्रियंका गांधी का नाम लिए बिना कहा कि लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस की एक प्रमुख नेत्री ने कहा था कि आज वंदे मातरम् पर चर्चा कराने की कोई जरूरत नहीं है।

वंदे मातरम पर चर्चा बंगाल में चुनावी लाभ वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए: खरगे

वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर राज्यसभा में हुई बहस के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह चर्चा बंगाल चुनावों को ध्यान में रखते हुए शुरू की है और सरकार जनता की असली समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। खरगे ने कहा, भारत माता को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मिलेगी जब संसद आम जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर उनका समाधान करेगी। उन्होंने सरकार पर बेरोजगारी, बिगड़ती अर्थव्यवस्था, गिरते रुपए और सामाजिक चुनौतियों जैसे विषयों पर बहस से बचने का आरोप लगाया।

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