प्राकृतिक खेती का ग्लोबल हब बन रहा भारत :मोदी
कोयंबटूर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में बुधवार को दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया और पीएम- किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त के रूप में 9 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की । इस मौके पर प्रधानमंत्री ने देशभर के किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने और एक एकड़, एक मौसम के मॉडल को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती 21वीं सदी की कृषि जरूरतों के अनुरूप है और यह भारत को वैश्विक स्तर पर रसायन- मुक्त कृषि का अग्रणी केंद्र बना सकती है। भारत प्राकृतिक खेती का ग्लोबल हब बनने के रास्ते पर है। युवा भी इसे एक मॉडर्न और स्केलेबल अवसर के रूप में देख रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती भारत की पारंपरिक, स्वदेशी कृषि पद्धति है जिसका आधार हमारे पूर्वजों का ज्ञान और प्रकृति के प्रति सम्मान है। रसायनों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है और खेती की लागत बढ़ रही है । समाधान फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती में है। प्रधानमंत्री ने किसानों को सलाह दी कि वे एक एकड़ खेत में एक मौसम के लिए प्राकृतिक खेती शुरू करके इसका प्रभाव स्वयं देखें । इस मॉडल से जोखिम कम होता है और किसान धीरे-धीरे संपूर्ण भूमि पर रसायन – मुक्त खेती कर सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि भारत सरकार भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने राज्य सरकारों से प्राकृतिक खेती आधारित बहु- फसल मॉडल को अपने कृषि कार्यक्रमों में शामिल करने का आग्रह किया। मोदी ने कहा, केरल और कर्नाटक के पहाड़ी इलाकों में बहु- मंजिला कृषि एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां एक ही भूमि पर कई फसलें उगाई जाती हैं। इसे पूरे भारत में अपनाया जाए। उन्होंने वैज्ञानिकों व कृषि अनुसंधान संस्थानों से भी प्राकृतिक खेती को कृषि पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा बनाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं से निकल कर खेतों को प्रयोगशाला बनाएं और किसानों के साथ मिलकर अनुसंधान करें।
अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाएगी कृषि की नयी दिशा
मोदी ने कहा कि कृषि नवाचार, वैज्ञानिक शोध, सरकारी समर्थन और किसानों की मेहनत मिलकर भारत को टिकाऊ और समृद्ध कृषि की ओर ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब पारंपरिक ज्ञान, विज्ञान की शक्ति और सरकार का समर्थन एक साथ जुड़ते हैं तो किसान भी समृद्ध होता है और धरती मां भी स्वस्थ रहती है। प्रधानमंत्री ने यह विश्वास व्यक्त किया कि भारत की नई कृषि दिशा आने वाले दशकों में देश की अर्थव्यवस्था और ग्लोबल फूड सिस्टम में बड़ी भूमिका निभाएगी।
सरकार दे रही राहत
प्रधानमंत्री ने पिछले 11 वर्षों में कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का कृषि निर्यात लगभग दोगुना हुआ है। उन्होंने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। जैव-उर्वरकों पर जीएसटी में कमी से भी किसानों को राहत मिली है।
