नई दिल्ली। जब कभी कोई जड़ (निर्जीव) वस्तु अपनी इच्छाशक्ति से प्रेरित होकर कोई कार्य करने लगती है तो उसके पीछे कोई न कोई रहस्य अवश्य ही छिपा होता है। विज्ञान ऐसे तथ्यों को बेबुनियाद बताता है किंतु इतिहास में घटित घटनाओं को नकारा नहीं जा सकता है। इतिहास साक्षी है कि इस प्रकार की घटनाएं एक नहीं, अनेक बार घटित हो चुकी हैं। लकड़ी तथा लोहे से बना एक समुद्री यात्री जहाज का नाम ‘एस. एस. हमबोल्ड’ था जिससे मालवाहन का काम भी लिया जाता था । इस जहाज से समुद्री यात्रा का प्रारंभ सन 1898 से किया गया था। प्रारंभिक दौर में इस जहाज से सीटल व अलास्का के बीच यात्राएं हुआ करती थी ।
जहाज के कैप्टन का नाम इलियाज जी. बोफमन था । जहाज के प्रारंभ होने के दिन से ही उन्हें जहाज के कैप्टन का भार सौंप दिया गया था। कैप्टन बोफमन ने अपना समुद्री जीवन भी हमबोल्ट से ही आरंभ किया था। यह भी आरंभ से लेकर अन्त तक एक विचित्राता ही रही कि न तो किसी अन्य कैप्टन ने इस जहाज का कभी संचालन किया था और न ही कैप्टन बोफमन ने ही किसी दूसरे जहाज का संचालन किया। कुछ दिन तक यह जहाज सीटल और अलास्का बंदरगाह के बीच चलने के बाद प्रशांत महासागर के उत्तर-पश्चिमी बंदरगाहों के बीच चलने लगा। कई बार जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच जाने के कारण इस जहाज को विघटित कर देने पर भी विचार किया गया परन्तु कैप्टन बोफमन के शालीन विरोध के कारण इस जहाज को विघटित नहीं किया जा सका।
अपना जल जीवन उसी जहाज से आरंभ करने के कारण कैप्टन बोफमन का उस जहाज से विशेष लगाव था। सन 1934 में कैप्टन बोफमन ने जब नौकरी से अवकाश ग्रहण किया, तब हम्बोल्ट को विघटित करने के लिए भेज दिया गया क्योंकि किसी भी अन्य कैप्टन ने उस जर्जर हो चुके जहाज का कार्यभार स्वीकार कर खतरा मोल लेना उचित नहीं समझा। अवकाश प्राप्त करने के बाद 8 अगस्त 1935 के दिन कैप्टन बोफमन का कैलिफोर्निया में जिस समय निधन हुआ, ठीक उसी समय वहां से लगभग साढ़े छह सौ किलोमीटर दूर पेड़ो बंदरगाह पर खड़े हमबोल्ट जहाज के लंगर अपने आप खुल गये और वह उत्तर दिशा की ओर कैलीफोर्निया के लिए अपने आप रवाना हो गया।
इस जहाज को पेड़ो बन्दरगाह पर विघटित करने के लिए लाया गया था और वहीं लंगर डालकर उसे खड़ा कर दिया गया था। अपने आप चलने वाले इस जहाज को देखकर पेड़ो बन्दरगाह पर मौजूद लोग आश्चर्य चकित रह गये थे क्योंकि बिना चालक ही वह जहाज अपनी दिशा में बढ़ने लगा था। लोग जब तक उस जहाज को रोकने का प्रयास करते, वह समुद्र में काफी अंदर पहुंच गया था। उस समय जहाज में कोई भी व्यक्ति नहीं था। बिना ईंधन (तेल- कोयला के बिना ही) ही वह जहाज समुद्र में यात्रा करता रहा। एक अन्य कैप्टन की सहायता से उस जहाज को लगभग छह माह बाद वापस पेड़ो बन्दगाह में लाया जा सका था।
