परिसीमन बिल पर BJP को अखिलेश यादव का साथ मिलने की उम्मीद? DMK को मनाने की कोशिश, समझें NDA का नंबर गेम

नई दिल्ली: केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक को संसद से पारित कराने की कोशिश में जुटी है, लेकिन इसके लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की नजर समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और कुछ अन्य विपक्षी दलों पर है। राजनीतिक समीकरणों के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या अखिलेश यादव की पार्टी मतदान से दूरी बनाकर सरकार की राह आसान कर सकती है और क्या डीएमके को मनाने में भाजपा सफल होगी।

लोकसभा और राज्यसभा में कितने वोटों की जरूरत?

रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा की तीन सीटें खाली होने के कारण सदन में फिलहाल 540 सांसद हैं। यदि सभी सांसद मौजूद रहते हैं और मतदान करते हैं, तो संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के वास्ते 360 वोटों की जरूरत होगी।

राज्यसभा में भी सरकार को पर्याप्त समर्थन जुटाना होगा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 244 सदस्यों वाले सदन में दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 वोटों की जरूरत बताई गई है। हालांकि, वास्तविक आवश्यक संख्या सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के आधार पर तय होती है।

NDA का नंबर गेम क्या कहता है?

खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, एनडीए को लोकसभा में करीब 320 सांसदों का समर्थन हासिल है। इसमें कुछ दलों के बागी सांसदों और सरकार का समर्थन करने वाले क्षेत्रीय दलों के सदस्यों को भी शामिल किया गया है। सभी संभावित समर्थकों के पक्ष में मतदान करने पर यह संख्या बढ़कर 324 तक पहुंचने का अनुमान है।

राज्यसभा में एनडीए को फिलहाल करीब 158 सांसदों का समर्थन मिलने की बात कही गई है। ऐसे में सरकार को दोनों सदनों में अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। रिपोर्ट में डीएमके, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार), शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), एआईएमआईएम, बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी जैसी पार्टियों से संपर्क की चर्चा है।

डीएमके को मनाने की कोशिश में भाजपा

परिसीमन के मुद्दे पर डीएमके पहले ही अपना विरोध जता चुकी है। पार्टी ने तमिलनाडु विधानसभा में परिसीमन के विरोध से जुड़े प्रस्ताव का समर्थन किया था और इस मुद्दे पर प्रदर्शन भी किए थे। इसके बावजूद भाजपा को उम्मीद है कि लोकसभा सीटों में संभावित बढ़ोतरी पर 50 प्रतिशत की सीमा तय करने जैसे प्रावधानों के जरिए डीएमके को सहमत किया जा सकता है।

हालांकि, डीएमके से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पार्टी विधेयक का वास्तविक मसौदा देखे बिना कोई आश्वासन नहीं देना चाहती। ऐसे में सरकार के लिए डीएमके का समर्थन हासिल करना आसान नहीं दिख रहा है।

क्या अखिलेश यादव की पार्टी से भी मिलेगी मदद?

भाजपा की नजर समाजवादी पार्टी पर भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस और सपा के बीच कुछ मुद्दों पर असहजता की चर्चा के बीच एनडीए को उम्मीद है कि अखिलेश यादव की पार्टी मतदान के दौरान तटस्थ रह सकती है या वोटिंग से दूरी बना सकती है।

उत्तर प्रदेश में परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या में संभावित बदलाव राजनीतिक दलों के लिए अहम हो सकता है। हालांकि, सपा की ओर से विधेयक पर समर्थन या मतदान से दूर रहने को लेकर कोई अंतिम फैसला होने की पुष्टि इस खबर में नहीं की गई है।

अगला सप्ताह सरकार के लिए अहम

परिसीमन विधेयक को लेकर संसद में संख्या बल जुटाने की कोशिशों के बीच अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। सरकार को विपक्षी दलों और अन्य संभावित सहयोगियों के रुख पर नजर रखनी होगी। डीएमके और सपा जैसी पार्टियों का फैसला इस राजनीतिक गणित को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल, विधेयक पर अंतिम सहमति और मतदान के नतीजे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सरकार के लिए चुनौती सिर्फ समर्थन बढ़ाने की नहीं, बल्कि दोनों सदनों में संविधान संशोधन के लिए आवश्यक बहुमत सुनिश्चित करने की भी है।

Related posts