लखनऊ: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बाद अब बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है। मायावती ने उत्तराखंड सरकार से मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजने की मांग की है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को भी निशाने पर लिया है।
जातिवादी और सामंती सोच पर मायावती का हमला
मायावती ने कहा कि हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद उनके मंच का दलित होने की वजह से शुद्धिकरण किए जाने की जानकारी संसद के माध्यम से देश के सामने आई। उन्होंने इस घटना को बेहद निंदनीय और चिंताजनक बताया।
बसपा प्रमुख ने कहा कि यह घटना जातिवादी और सामंती मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार से बिना देरी किए ऐसे जातिवादी और सामंती सोच रखने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उन्हें जेल भेजने की मांग की।
मोहन भागवत को भी मायावती ने घेरा
मायावती ने आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक ओर इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर आरएसएस प्रमुख दलित समाज के उन लोगों को आरक्षण से वंचित करने की बात कर रहे हैं, जो आर्थिक रूप से कुछ मजबूत हुए हैं।
बसपा अध्यक्ष ने ऐसी सोच को दलित समाज के हितों के खिलाफ बताया और इसी मुद्दे को लेकर संघ प्रमुख को कटघरे में खड़ा किया।
अखिलेश यादव भी भाजपा पर बरसे
मायावती से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी हल्द्वानी की घटना को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि भाजपा के शासन में सामाजिक भेदभाव का यह बेहद खराब रूप है कि जिस मंच से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संबोधन किया, उसका कुछ प्रभुत्ववादी लोगों ने सिर्फ इसलिए शुद्धिकरण किया क्योंकि खरगे दलित समाज से आते हैं।
अखिलेश यादव ने कहा था कि भाजपाइयों और उनके सहयोगियों को मंच का नहीं, बल्कि अपने कलुषित मन का गंगाजल से शुद्धिकरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक दुर्व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न के हर मामले का पीडीए समाज एकजुट होकर जवाब देगा। अखिलेश के मुताबिक, पीडीए समाज अब अपना अपमान सहने के मूड में नहीं है।
अजय राय ने बताया दलितों का घोर अपमान
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी इस घटना को निंदनीय बताते हुए इसे दलित वर्ग का घोर अपमान करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से भाजपा का दलित विरोधी चेहरा सामने आया है।
अजय राय ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से आरोप लगाती रही है कि आजादी के 80 साल बीतने के बाद भी आरएसएस और भाजपा के भीतर दलितों के प्रति भेदभाव की मानसिकता बनी हुई है। उनके मुताबिक, हल्द्वानी की घटना ने इन आरोपों की पुष्टि कर दी है।
प्रधानमंत्री से माफी मांगने की मांग
अजय राय ने कहा कि घटना के बाद देशभर के दलितों में आक्रोश है। उन्होंने भाजपा पर संविधान विरोधी और घिनौना कृत्य करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री से देश से माफी मांगने की मांग की।
उन्होंने कहा कि शुद्धिकरण की जरूरत मंच को नहीं, बल्कि भाजपा और आरएसएस की जातिवादी राजनीति को है। अजय राय ने कहा कि मंच के शुद्धिकरण की घटना सिर्फ मल्लिकार्जुन खरगे का अपमान नहीं है, बल्कि यह देश के प्रत्येक दलित और बाबा साहेब के संविधान पर प्रहार है।
गोलवलकर के कथित बयान का भी अजय राय ने किया जिक्र
अजय राय ने आरएसएस के विचारक गोलवलकर के एक कथित बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि गोलवलकर ने कहा था कि वह पूरी जिंदगी गुलामी करने को तैयार हैं, लेकिन दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों को बराबरी का अधिकार मिले, ऐसी आजादी उन्हें मंजूर नहीं है।
अजय राय ने आरोप लगाया कि इसी सोच के तहत आरएसएस और भाजपा आजादी से पहले और उसके बाद भी दलित वर्ग की उपेक्षा करती आ रही हैं।
