मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का आदेश रद्द, विजय सरकार को झटका

चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को दया के आधार पर सरकारी नौकरी देने का फैसला लिया गया था। अदालत ने कहा कि इस तरह की नियुक्तियां संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं और इससे भविष्य में ऐसे मामलों में समान मांगों का रास्ता खुल सकता है।

सरकार की शक्तियां भी संविधान की सीमाओं में बंधी हैं

मदुरै पीठ ने अपने फैसले में कहा कि राज्य सरकार अपनी प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल संविधान की निर्धारित सीमाओं के भीतर ही कर सकती है। अदालत के अनुसार, दया के आधार पर नौकरी देने का यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 की भावना के अनुरूप नहीं है।

कोर्ट ने बताया क्यों रद्द किया सरकार का फैसला

अदालत ने कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों में पहले से ही ऐसे अनेक लोग हैं, जो दया के आधार पर नियुक्ति का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में केवल इस घटना के पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी देना समानता के सिद्धांत के विपरीत होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक निर्णय भी संवैधानिक प्रावधानों के अधीन होते हैं।

‘ऐसे फैसलों से बढ़ेंगी समान मांगें’

हाई कोर्ट ने कहा कि यदि इस मामले में दया के आधार पर नियुक्ति की अनुमति दी जाती, तो भविष्य में अन्य हादसों के पीड़ित परिवार भी इसी तरह की मांग कर सकते हैं। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि आतिशबाजी हादसों और सड़क दुर्घटनाओं जैसे मामलों में भी, जहां सरकारी लापरवाही के आरोप लगे, वहां पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी नहीं बल्कि आर्थिक सहायता दी गई थी। ऐसे में इस मामले में अलग व्यवस्था करना उचित नहीं माना जा सकता।

जुलाई में परिजनों को सौंपे गए थे नियुक्ति पत्र

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने जुलाई की शुरुआत में करूर का दौरा किया था। इस दौरान भगदड़ में जान गंवाने वाले 32 पीड़ित परिवारों के परिजनों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद इस निर्णय पर रोक लग गई है।

करूर भगदड़ में गई थी 41 लोगों की जान

तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर 2025 को आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हुए थे। अब सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु सरकार हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर सकती है।

 

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