लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में सोमवार को आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इस दौरान विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान गतिविधियों, वैश्विक रैंकिंग, डिजिटल गवर्नेंस और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, आईक्यूएसी के बाहरी सदस्य अतुल कुमार दुबे तथा आईक्यूएसी निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। विभिन्न प्रस्तावों, विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता संवर्धन से जुड़े मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
आउटकम आधारित शिक्षा और शोध को मजबूत करने पर जोर
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने विश्वविद्यालय में आउटकम आधारित शिक्षा और अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियां विकसित की जानी चाहिए जो पाठ्यक्रम, शैक्षणिक गतिविधियों, सामाजिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों के साथ भावनात्मक बुद्धिमत्ता के विकास को भी प्रोत्साहित करें।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, सतत विकास लक्ष्यों और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के अनुरूप पाठ्यक्रमों का व्यापक पुनरीक्षण किया जाएगा। साथ ही शिक्षण कार्यों के डिजिटलीकरण, सेल्फ लर्निंग मैटेरियल, ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
डिजिटल शिक्षा और रिकॉर्डेड लेक्चर पर रहेगा फोकस
कुलपति ने शिक्षकों से अपने विषयों के व्याख्यान रिकॉर्ड कर विद्यार्थियों तक पहुंचाने का आह्वान किया, ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीकों के उपयोग से शिक्षा प्रणाली को अधिक सुलभ और परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है।
समाज और विश्वविद्यालय के बीच मजबूत होंगे संबंध
बैठक के दौरान प्रो. मित्तल ने समाज और विश्वविद्यालय के बीच संवाद और सहभागिता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के माध्यम से अभिभावकों और समाज को विश्वविद्यालय की गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे, जिससे सामाजिक समरसता और जनसहभागिता को बढ़ावा मिलेगा।
समाजोपयोगी शोध और स्टार्टअप संस्कृति पर विशेष जोर
अनुसंधान के क्षेत्र में कुलपति ने कहा कि शोध कार्य ऐसे होने चाहिए जो समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में उपयोगी साबित हों और जिनकी सामाजिक व आर्थिक प्रासंगिकता हो। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को प्रभावी मार्गदर्शन और मेंटरशिप प्रदान करने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए नवकल्पना सेक्शन-8 कंपनी की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित किया जा रहा है।
आईक्यूएसी ने साझा की उपलब्धियां और भविष्य की रणनीति
आईक्यूएसी निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा ने बैठक में गुणवत्ता संवर्धन से जुड़ी विभिन्न पहलों और गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने समर्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत बनाने और विभिन्न मॉड्यूलों के सफल संचालन पर प्रकाश डाला।
उन्होंने विश्वविद्यालय को प्राप्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग्स, उपलब्धियों तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए संस्थागत रोडमैप की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय नवाचार, उद्यमिता, समग्र शिक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
सदस्यों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, अनुसंधान और प्रशासनिक कार्यों को और अधिक प्रभावी तथा गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। सभी ने शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
