TMC में बढ़ी बगावत की आहट! बागी सांसदों पर बरसे कीर्ति आजाद-कल्याण बनर्जी, बोले- ‘दम है तो इस्तीफा देकर BJP के टिकट पर लड़ें चुनाव’

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के भीतर सियासी खींचतान अब खुलकर सामने आती दिख रही है। पार्टी के कुछ सांसदों के भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव के आवास पहुंचने और दल बदल की चर्चाओं के बीच टीएमसी नेतृत्व ने कड़ा रुख अपना लिया है। पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें सीधे तौर पर “गद्दार” करार दिया और खुली चुनौती दे डाली कि यदि उनमें साहस है तो सांसद पद से इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर दिखाएं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच काकोली घोष दस्तीदार को लेकर भी सियासी अटकलें तेज हैं। बताया जा रहा है कि उनका फोन सुबह से बंद है और उनके करीबी लोगों को भी उनकी गतिविधियों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है।

स्पीकर को चिट्ठी मिलने के दावे पर उठाए सवाल

कल्याण बनर्जी ने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को कथित तौर पर भेजे गए पत्र को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 24 घंटे बीत जाने के बावजूद वह पत्र सार्वजनिक नहीं हुआ है और लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से भी ऐसी किसी चिट्ठी के प्राप्त होने की पुष्टि नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जमकर प्रशंसा की थी, वही अब यह तर्क दे रहे हैं कि वे पार्टी में रहकर विकास कार्य नहीं कर पा रहे थे। कल्याण बनर्जी ने कहा कि यदि किसी को भाजपा में जाना है तो वह खुलकर जाए, पार्टी छोड़े और जनता के बीच जाकर चुनाव लड़े।

दलबदल कानून और राजनीतिक भविष्य पर भी दी चेतावनी

टीएमसी सांसद ने कहा कि जिन सांसदों के नाम इस पूरे विवाद में सामने आ रहे हैं, उन्हें दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का भी सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के साथ संपर्क में आने के बाद इन नेताओं की राजनीतिक निष्ठा पूरी तरह बदल गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि आरजी कर अस्पताल प्रकरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जिन नेताओं ने चुप्पी साधे रखी, वे आज पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं के संघर्ष के समय इन नेताओं की भूमिका दिखाई नहीं दी थी।

‘तृणमूल विरासत में नहीं मिली, संघर्ष से बनी है’

कल्याण बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि तृणमूल कांग्रेस किसी को विरासत में नहीं मिली है, बल्कि लंबे राजनीतिक संघर्ष के बाद खड़ी हुई है। उन्होंने बागी नेताओं से सवाल किया कि आखिर उनके साथ ऐसा क्या अन्याय हुआ, जिसकी वजह से वे पार्टी से दूरी बना रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनावों में भाजपा को बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा और जनता उनके प्रयासों का जवाब देगी।

कीर्ति आजाद का भी तीखा हमला

टीएमसी के वरिष्ठ नेता कीर्ति आजाद ने भी बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि पूरा घटनाक्रम भाजपा के इशारे पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी ने कई बार अवसर दिए, वही आज संगठन के खिलाफ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

कीर्ति आजाद ने कहा कि यदि किसी नेता को पार्टी से शिकायत थी तो उसे पहले संगठन के भीतर अपनी बात रखनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के साथ बैठकों में शामिल होकर अब ये लोग अपनी राजनीतिक दिशा स्पष्ट कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे स्वतंत्र हैं, लेकिन उन्हें तृणमूल कांग्रेस के नाम और संघर्ष का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि पार्टी मां, माटी और मानुष के सिद्धांतों पर खड़ी है और इसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश का राजनीतिक जवाब दिया जाएगा।

 

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