‘महाभारत’ की द्रौपदी से राजनीति की मजबूत आवाज तक, रूपा गांगुली ने पर्दे से पावर तक का तय किया लंबा सफर

नई दिल्ली। दूरदर्शन पर प्रसारित हुए चर्चित धारावाहिक महाभारत का हर किरदार आज भी दर्शकों की यादों में जीवंत है, लेकिन द्रौपदी का नाम आते ही जिस चेहरे की छवि उभरती है, वह है रूपा गांगुली की। कोलकाता में जन्मीं रूपा गांगुली ने अपने दमदार अभिनय से इस किरदार को ऐसा जीवंत किया कि दशकों बाद भी उनकी पहचान उसी भूमिका से जुड़ी हुई है।

द्रौपदी के किरदार ने दिलाई अमिट पहचान
बीआर चोपड़ा के निर्देशन में बने इस ऐतिहासिक धारावाहिक में रूपा गांगुली ने द्रौपदी की भूमिका को गहराई और प्रभाव के साथ निभाया। खासतौर पर चीरहरण जैसे दृश्यों में उनके अभिनय ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। पांचाल नरेश द्रुपद की पुत्री और पांडवों की पत्नी के रूप में उनके किरदार को आज भी भारतीय टेलीविजन के सबसे प्रभावशाली प्रस्तुतियों में गिना जाता है। इस भूमिका के लिए उन्हें स्मिता पाटिल मेमोरियल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

शोहरत के बावजूद निजी जिंदगी ने बदली राह
टीवी और फिल्मों में सफलता हासिल करने के बाद रूपा गांगुली ने अभिनय से दूरी बना ली। वर्ष 1992 में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियर ध्रुव मुखर्जी से विवाह किया, लेकिन यह रिश्ता 2007 में टूट गया। बाद में उनके जीवन में बंगाली गायक दिव्येंदु मुखर्जी आए, हालांकि यह संबंध भी आगे नहीं बढ़ सका। एक रियलिटी शो में उन्होंने खुलासा किया था कि वैवाहिक जीवन के दबाव के चलते उन्हें अभिनय छोड़ना पड़ा। अपने करियर में उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार और दो बीएफजेए पुरस्कार सहित कई सम्मान हासिल किए।

राजनीति में सक्रिय, निभा रहीं नई भूमिका
अभिनय से दूरी बनाने के बाद रूपा गांगुली ने राजनीति का रुख किया और 2015 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुईं। इसके बाद उन्होंने 2016 से 2022 तक राज्यसभा सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। पश्चिम बंगाल में पार्टी की महिला मोर्चा की अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में लगातार सक्रियता
वर्तमान समय में रूपा गांगुली पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और विधानसभा चुनावों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी हैं। टीवी की द्रौपदी अब एक मजबूत राजनीतिक पहचान के साथ सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं।


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