इंसानी शरीर को समझना किसी पहेली को सुलझाने जैसा है। शरीर के भीतर की संरचना और कार्यप्रणाली इतनी जटिल है कि यह अपने आप में एक अलग दुनिया लगती है। शरीर की रक्त वाहिकाओं को यदि सीधा करके जोड़ा जाए तो उनकी लंबाई लगभग 96 हजार किलोमीटर से भी अधिक हो सकती है। दिल दिनभर में एक लाख से ज्यादा बार धड़कता है और रोजाना हजारों गैलन खून पंप करता है, जबकि दिमाग में अरबों न्यूरॉन्स और उनके बीच अनगिनत कनेक्शन मौजूद होते हैं।
शरीर के ये सभी अंग बेहद शक्तिशाली होते हुए भी कुछ बीमारियों के आगे कमजोर पड़ जाते हैं। इन्हीं में से एक बड़ी समस्या है अत्यधिक शुगर का सेवन, जिसे सेहत का ‘सफेद जहर’ भी कहा जाता है। यही शुगर धीरे-धीरे शरीर को भीतर से नुकसान पहुंचाते हुए डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी का कारण बनती है।
शुगर का बढ़ता खतरा और शरीर पर असर
अत्यधिक शुगर का सेवन सिर्फ डायबिटीज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है। बच्चों में यह दिमाग पर असर डालकर व्यवहार संबंधी समस्याएं बढ़ा सकता है, वहीं बड़ों में याददाश्त से जुड़ी परेशानियां देखी जाती हैं। आंखों पर इसका असर ग्लूकोमा जैसी समस्या के रूप में सामने आता है, जबकि दांतों में कैविटी, त्वचा की समय से पहले उम्र बढ़ना और नींद से जुड़ी समस्याएं भी इससे जुड़ी मानी जाती हैं।
भारत में तेजी से बढ़ रहे डायबिटीज के मरीज
देश में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। चिंताजनक बात यह है कि करीब 50 प्रतिशत लोगों को यह तक पता नहीं कि वे डायबिटीज के शिकार हैं। पिछले चार वर्षों में मरीजों की संख्या में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इन अंगों को सबसे ज्यादा खतरा
डायबिटीज का असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है। इसमें दिमाग, आंखें, दिल, लिवर, किडनी और जोड़ों पर गंभीर प्रभाव देखने को मिलता है। लंबे समय तक शुगर कंट्रोल में न रहने पर इन अंगों के काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
दिल के मरीजों में भी बढ़ोतरी
डायबिटीज और हृदय रोग के बीच गहरा संबंध देखा जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 22 प्रतिशत डायबिटीज मरीजों को दिल का दौरा पड़ रहा है। सामान्य लोगों के मुकाबले शुगर मरीजों में हार्ट अटैक का खतरा करीब चार गुना अधिक होता है।
डायबिटीज के प्रमुख लक्षण
डायबिटीज के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनमें ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक भूख लगना, अचानक वजन घटना, चिड़चिड़ापन, थकान, कमजोरी और धुंधला दिखाई देना शामिल हैं।
ब्लड शुगर के सामान्य स्तर
खाली पेट ब्लड शुगर 100 mg/dl से कम और खाने के बाद 140 mg/dl से कम होना सामान्य माना जाता है।
प्री-डायबिटीज की स्थिति
यदि खाली पेट शुगर 100 से 125 mg/dl और खाने के बाद 140 से 199 mg/dl के बीच है, तो इसे प्री-डायबिटीज माना जाता है, जो भविष्य में खतरे का संकेत हो सकता है।
डायबिटीज की पुष्टि
जब खाली पेट शुगर 125 mg/dl से अधिक और खाने के बाद 200 mg/dl से ऊपर पहुंच जाए, तो यह डायबिटीज की स्थिति मानी जाती है और तुरंत नियंत्रण की जरूरत होती है।
शुगर कंट्रोल करने के उपाय
डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए खानपान और जीवनशैली में बदलाव बेहद जरूरी है। खीरा, करेला और टमाटर का जूस फायदेमंद माना जाता है। गिलोय का काढ़ा भी उपयोगी हो सकता है। योग में मंडूकासन और योगमुद्रासन को लाभकारी बताया जाता है, जबकि रोजाना 15 मिनट कपालभाति करने से भी नियंत्रण में मदद मिल सकती है।
