नई दिल्ली। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ईरान में जहां एक ओर शोक का माहौल बताया जा रहा है, वहीं कुछ स्थानों पर जश्न की खबरें भी आईं। इस घटनाक्रम पर दुनिया के कई प्रमुख देशों ने प्रतिक्रिया दी है।
अमेरिका ने पहले दी मौत की जानकारी
ईरानी प्रशासन या स्थानीय मीडिया से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई की मौत की जानकारी सार्वजनिक की। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर लिखा कि “इतिहास के सबसे क्रूर लोगों में से एक, खामेनेई अब मर चुका है।” उन्होंने इसे ईरान की जनता और उन अमेरिकी नागरिकों के लिए न्याय बताया, जो कथित रूप से खामेनेई के फैसलों से प्रभावित हुए थे।
रूस ने जताई संवेदना, हमले को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के अपने समकक्ष मसूद पेजेशकियन को पत्र लिखकर संवेदना व्यक्त की। रूसी पक्ष ने इस घटना को मानवीय नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया। संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने चेतावनी दी कि यह हमला क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।
चीन ने भी की कड़ी निंदा
चीन ने अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। चीनी विदेश मंत्रालय ने इसे ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन करार दिया और कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। चीन ने सैन्य अभियान को तत्काल रोकने की मांग की।
जर्मनी ने शांति और स्थिरता पर दिया जोर
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि ईरान की जनता को अपने भविष्य का निर्णय लेने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि जर्मन सरकार अमेरिका, इजरायल और क्षेत्र के अन्य सहयोगियों के साथ संपर्क में है। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
ब्रिटेन और फ्रांस ने संवाद की अपील की
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने एक साझा बयान जारी कर स्थिति पर चिंता जताई। बयान में कहा गया कि इन देशों ने हमलों में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन वे अमेरिका और इजरायल के संपर्क में हैं। साथ ही ईरानी नेतृत्व से बातचीत का रास्ता अपनाने और जनता को अपने भविष्य का निर्णय लेने का अवसर देने की अपील की गई।
