भारत का नया लक्ष्य: अमीर-गरीब सभी देशों तक पहुंचे AI का लाभ, नई दिल्ली में शुरू हुआ एआई इंपैक्ट समिट

नई दिल्ली। दुनिया के विकासशील और गरीब देशों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तक समान पहुंच दिलाने की दिशा में भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार से नई दिल्ली में शुरू हुए एआई इंपैक्ट समिट में भारत ने अपनी नीति का ऐलान करते हुए कहा कि AI का लाभ हर देश और हर वर्ग तक पहुंचे। इस समिट का मुख्य नारा रखा गया है – ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’।

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि भारत यह संदेश देना चाहता है कि AI मानव के विकास के लिए हो और इसका लाभ किसी से वंचित न रहे। भारत का उद्देश्य लोकतांत्रिक और सुरक्षित AI मॉडल विकसित करना है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, स्किलिंग, पर्यावरण, नारी विकास, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में देश और दुनिया दोनों के लिए लाभकारी हो।

एआई में वैश्विक साझेदारी और भारत की भूमिका

विश्व स्तर पर एआई पर अमेरिका और चीन का दबदबा है, लेकिन भारत खुद को न सिर्फ उपयोगकर्ता बल्कि इस तकनीक का निर्माता भी बनाना चाहता है। ओपनएआई के सीईओ सैम अल्टमैन ने कहा कि भारत में एआई नेतृत्व की क्षमता है और यह देश अब वैश्विक एआई रणनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने बताया कि AI एक दोधारी तलवार है। सरकार का प्रयास सकारात्मक अवसरों को तेज करना और संभावित जोखिमों को कम करना है। उन्होंने कहा कि AI के लंबे समय तक बच्चों और समाज पर असर का मूल्यांकन करना भी जरूरी है।

समिट में भागीदारी और वैश्विक हस्तियां

अगले चार दिनों तक चलने वाले इस समिट में 100 से अधिक देशों की सैकड़ों कंपनियां शामिल हैं। भारत में 2.5 लाख से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। तकनीकी दिग्गज जैसे सैम अल्टमैन (OpenAI), यान लेकुन (Meta), ब्रैड स्मिथ (Microsoft), सुंदर पिचाई (Google), बिल गेट्स (Microsoft) समेत कई अन्य शख्सियतें इस समिट में भाग ले रही हैं।

वैश्विक एआई बाजार 288 अरब डॉलर का है, जबकि भारत का एआई बाजार लगभग आठ अरब डॉलर का है। अमेरिका और चीन इस क्षेत्र के सबसे बड़े निवेशक हैं। भारत की यह पहल ग्लोबल AI इकोसिस्टम में विकासशील देशों को समान अवसर देने के दृष्टिकोण से अहम मानी जा रही है।

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