नई दिल्ली: विटामिन D शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। यह हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। धूप कम लेने और खराब जीवनशैली की वजह से कई लोगों में विटामिन D की कमी देखी जाती है। एनेस्थिसियोलॉजी और इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन के डॉक्टर कुणाल सूद ने विटामिन D की कमी से जुड़े कुछ ऐसे संकेत बताए हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हड्डियों में दर्द हो सकता है संकेत
विटामिन D हड्डियों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी होने पर हड्डियों में दर्द की समस्या हो सकती है। लंबे समय तक गंभीर कमी रहने पर हड्डियों के खनिजीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे ऑस्टियोमलेशिया की स्थिति बन सकती है।
इसमें खास तौर पर पीठ के निचले हिस्से, पेल्विस, कूल्हों और पैरों में गहरा दर्द या संवेदनशीलता महसूस हो सकती है।
मांसपेशियों में कमजोरी और रोजमर्रा के काम में परेशानी
विटामिन D की कमी का असर मांसपेशियों पर भी पड़ सकता है। खासकर कूल्हों और जांघों के आसपास की मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो सकती है। इसके चलते सीढ़ियां चढ़ने या नीची कुर्सी से उठने जैसे सामान्य कामों में परेशानी हो सकती है।
हालांकि, विटामिन D की वास्तविक कमी को ठीक करने से फायदा हो सकता है, लेकिन केवल अधिक मात्रा में विटामिन D लेने से मांसपेशियों की ताकत अपने आप नहीं बढ़ती।
लगातार थकान भी हो सकती है एक वजह
डॉक्टर कुणाल सूद के अनुसार, विटामिन D का कम स्तर अवसाद के लक्षणों से जुड़ा पाया गया है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि विटामिन D की कमी ही अवसाद का कारण है।
कुछ परीक्षणों से संकेत मिलता है कि विटामिन D अवसाद के लक्षणों वाले कुछ लोगों में सहायक भूमिका निभा सकता है, लेकिन यह अवसाद के इलाज का विकल्प नहीं है।
मामूली चोट में भी फ्रैक्चर का खतरा
लंबे समय तक विटामिन D की गंभीर कमी रहने पर ऑस्टियोमलेशिया के कारण हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। इससे सामान्य दबाव या चोट को सहने की हड्डियों की क्षमता कम हो सकती है और मामूली चोट में भी फ्रैक्चर हो सकता है।
हालांकि, फ्रैक्चर केवल विटामिन D की कमी की वजह से ही नहीं होते। ऑस्टियोपोरोसिस, कुछ दवाएं और हड्डियों से जुड़ी अन्य बीमारियां भी इसके कारण हो सकती हैं।
