गणेश चतुर्थी पर घर में कैसी मूर्ति लाएं? बैठी मुद्रा और सूंड की दिशा का रखें खास ध्यान, जानें कौन सा स्वरूप माना जाता है शुभ

Lucknow : भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से गणेश चतुर्थी के पावन पर्व की शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर घर-घर में गणपति बप्पा की स्थापना की जा रही है। बाजार में भगवान गणेश की अलग-अलग मुद्राओं और अलग-अलग दिशाओं में मुड़ी सूंड वाली प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में घर के लिए गणेश प्रतिमा खरीदते समय लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि कौन सा स्वरूप शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में प्रतिमा की मुद्रा के साथ-साथ सूंड की दिशा का भी विशेष महत्व बताया गया है।

घर के लिए बैठी हुई प्रतिमा को माना जाता है शुभ

घर में गणेश जी की बैठी हुई मुद्रा वाली प्रतिमा स्थापित करना शुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार, बैठी हुई प्रतिमा सुख, समृद्धि और स्थायित्व का प्रतीक होती है। ऐसा माना जाता है कि जब गणपति बप्पा घर में विराजमान होते हैं तो परिवार में सुख और शांति लंबे समय तक बनी रहती है।

वहीं, खड़ी मुद्रा वाली गणेश प्रतिमा को दुकानों और कार्यस्थलों के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है। घर के मंदिर में खड़ी प्रतिमा स्थापित करने से बचने की मान्यता है। इसलिए घर में गणपति स्थापना के लिए प्रतिमा चुनते समय बैठी हुई अवस्था वाली मूर्ति को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है। मान्यता के अनुसार, इससे घर में स्थिरता और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

बाईं ओर सूंड वाले गणेश गृहस्थों के लिए माने जाते हैं शुभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी को रिद्धि-सिद्धि प्रदान करने वाला स्वरूप माना जाता है। इस रूप को चंद्रमा से प्रभावित और बेहद सौम्य बताया जाता है। बाईं सूंड वाले गणेश जी की पूजा के नियम भी सरल और सहज माने जाते हैं, इसलिए सामान्य व्यक्ति भी आसानी से इनकी उपासना कर सकता है।

इसी वजह से गृहस्थ जीवन में बाईं ओर सूंड वाली गणेश प्रतिमा की स्थापना को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि घर में इस स्वरूप की प्रतिमा स्थापित करने से परिवार में शांति और आपसी प्रेम बना रहता है। गृहस्थ लोगों के लिए घर के मंदिर में इसी स्वरूप की पूजा करने की परंपरा बताई गई है।

दाईं ओर सूंड वाले गणेश की पूजा में क्यों जरूरी है विशेष सावधानी?

दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी को सूर्य से प्रभावित स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस रूप को तेजस्वी और कठोर स्वभाव वाला बताया गया है। इनकी पूजा में कर्मकांड और शुद्धता से जुड़े कड़े नियमों का पालन करने की बात कही जाती है।

मान्यता के अनुसार, पूजा के नियमों में थोड़ी सी भी चूक उचित नहीं मानी जाती। इसी वजह से दाईं ओर सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा को मुख्य रूप से मंदिरों में स्थापित करने की परंपरा बताई जाती है। सामान्य घरों में इस स्वरूप की पूजा करना कठिन माना जाता है, क्योंकि हर व्यक्ति के लिए इससे जुड़े सभी नियमों का पालन करना आसान नहीं होता।

घर में गणपति स्थापना के लिए कौन सी मूर्ति चुनें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड और बैठी हुई मुद्रा वाली गणेश प्रतिमा को सबसे शुभ माना जाता है। इसे गृहस्थ जीवन के लिए सौम्य और सहज स्वरूप बताया गया है। गणेश चतुर्थी पर प्रतिमा खरीदते समय भक्त इन बातों का ध्यान रखते हुए अपने घर के लिए गणपति बप्पा का स्वरूप चुन सकते हैं।

 

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