नई दिल्ली। महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। शिवलिंग की पूजा-अर्चना के बाद भक्त नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना फुसफुसाते हुए नजर आते हैं। धार्मिक मान्यता है कि नंदी के कान में कही गई प्रार्थना सीधे भगवान शिव तक पहुंचती है। हालांकि, इसके लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी बताया गया है।
महादेव के प्रिय भक्त और संदेशवाहक हैं नंदी
नंदी महाराज को भगवान शिव का वाहन, परम भक्त और द्वारपाल माना जाता है। शिव मंदिरों में उनकी प्रतिमा हमेशा शिवलिंग की ओर मुख किए होती है, जो उनके अटूट ध्यान और भक्ति का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव अक्सर गहन समाधि में लीन रहते हैं। ऐसे में भक्त अपनी प्रार्थना नंदी के माध्यम से महादेव तक पहुंचाते हैं। माना जाता है कि नंदी उचित समय आने पर भक्तों की बात शिव तक पहुंचाते हैं।
दाहिने कान में ही क्यों कही जाती है बात?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, नंदी के दाहिने (Right) कान में मनोकामना कहना शुभ और प्रभावी माना जाता है। मान्यता है कि दाहिना पक्ष सकारात्मक ऊर्जा और धर्म का प्रतीक है। इसलिए भक्त अपनी इच्छा दाहिने कान में कहते हैं, ताकि वह सीधे और स्पष्ट रूप से महादेव तक पहुंचे।
मनोकामना कहते समय इन 5 नियमों का रखें ध्यान
पहला नियम – पूजा और शुद्धता: नंदी के पास जाने से पहले स्वयं को शुद्ध करें और विधि-विधान से शिवलिंग की पूजा करें। नंदी के समक्ष दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित करें।
दूसरा नियम – मंत्र उच्चारण: अपनी इच्छा व्यक्त करने से पहले ‘ॐ’ या ‘ॐ नंदीश्वराय नमः’ मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि इससे नंदी महाराज का ध्यान आपकी ओर केंद्रित होता है।
तीसरा नियम – गोपनीयता: मनोकामना कहते समय अपने होंठों को हाथ से ढक लें, ताकि आपकी बात कोई और न सुन सके। इच्छा को धीमे और स्पष्ट शब्दों में व्यक्त करें।
चौथा नियम – कान बंद करने की परंपरा: कुछ मान्यताओं के अनुसार, दाहिने कान में बोलते समय नंदी के बाएं (Left) कान को हाथ से बंद कर लेना चाहिए, ताकि संदेश इधर-उधर न भटके।
पांचवां नियम – एक समय में एक ही इच्छा: श्रद्धा और विश्वास बनाए रखने के लिए एक बार में केवल एक ही मनोकामना कहें। अंत में नंदी महाराज को प्रणाम कर उनका आभार व्यक्त करें और आशीर्वाद लें।
महाशिवरात्रि के अवसर पर इन नियमों का पालन करते हुए श्रद्धा से की गई प्रार्थना को अत्यंत फलदायी माना गया है। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से कही गई बात नंदी के माध्यम से अवश्य ही महादेव तक पहुंचती है।
