यूपी में आठ साल में 62 फीसद बढ़ी यूपी में ट्रैक्टर्स की संख्या

बदले दौर में किसानों की शान और संपन्नता के प्रमाण माने जाते हैं ट्रैक्टर लखनऊ। बात करीब चार दशक पुरानी है। तब किसी किसान की संपन्नता का पैमाना दरवाजे पर बंधे बैलों की संख्या होती थी। धीरे-धीरे ट्रैक्टर ने बैलों को खेतीबाड़ी में अप्रासंगिक बना दिया। बदले दौर में अब ट्रैक्टर ही किसानों की शान, संपन्नता और खुशहाली के प्रमाण हैं। ट्रैक्टरों की संख्या के लिहाज से देखें तो यूपी के किसान खुशहाल हैं। आठ साल में 62 फीसद बढ़ी यूपी में ट्रैक्टर्स की संख्यामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश…

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