नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों के संचालन पर बढ़ती सख्ती को लेकर विरोध तेज हो गया है। इस फैसले के खिलाफ अब स्थानीय स्तर पर जनाक्रोश के साथ-साथ राजनीतिक मोर्चा भी खुलकर सामने आ गया है। भारत से सटे सर्लाही जिले में रविवार को सात प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने संयुक्त बैठक कर प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है।
सर्वदलीय बैठक में सरकार को खुली चेतावनी
सोनबरसा से सटे सर्लाही जिले में हुई इस बैठक में नेताओं ने कहा कि अगर भारतीय वाहनों पर लगाई गई सख्ती को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन करना उनकी मजबूरी होगी। नेताओं ने आरोप लगाया कि सीमित दायरे में ही वाहन संचालन की अनुमति और उस पर भी कस्टम शुल्क की बाध्यता आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है।
‘रोटी-बेटी’ संबंधों पर असर का आरोप
बैठक में नेताओं ने इस नीति को अव्यावहारिक और जनविरोधी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि भारत और नेपाल के बीच सदियों से चले आ रहे ‘रोटी-बेटी’ के सामाजिक संबंधों पर इस तरह के फैसलों का सीधा असर पड़ रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सीमावर्ती लोगों के जीवन पर पड़ रहा असर
नेताओं ने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्र के लोग लंबे समय से लगभग 30 किलोमीटर के दायरे में भारतीय वाहनों का सहज रूप से उपयोग करते आ रहे हैं। ऐसे में अचानक सख्ती लागू करना न केवल असुविधाजनक है, बल्कि इससे स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन, व्यापार और सामाजिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
आंदोलन की दी चेतावनी
सर्वदलीय बैठक के बाद जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में जिला प्रशासन से मांग की गई कि भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों के आवागमन को पहले की तरह बहाल किया जाए। साथ ही बिना कस्टम प्रक्रिया के वाहन संचालन पर लगी रोक को भी हटाने की अपील की गई है। नेताओं ने साफ कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
सभी दलों ने मिलकर जताया विरोध
इस विरोध में विभिन्न राजनीतिक दलों के स्थानीय नेताओं ने एकजुट होकर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें नेकपा (एमाले), जनता समाजवादी पार्टी, राप्रपा नेपाल सहित अन्य दलों के जिला स्तर के नेता शामिल हैं। सभी ने एक सुर में इस फैसले को वापस लेने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
