नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच 10 जुलाई 2026 को भी देशभर में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में करीब 6 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, तेल विपणन कंपनियों ने फिलहाल ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 |
| चेन्नई | 107.77 | 99.55 |
| अहमदाबाद | 101.70 | 97.84 |
| पटना | 113.35 | 99.36 |
| लखनऊ | 102.04 | 95.53 |
| पुणे | 111.52 | 98.15 |
| तिरुवनंतपुरम | 115.49 | 104.40 |
| लेह | 109.81 | 97.92 |
क्यों बढ़ीं कच्चे तेल की कीमतें?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 78.66 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 74.65 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद निवेशकों में यह आशंका बढ़ी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी संभावना के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से आयात लागत बढ़ जाती है। फिलहाल इसका असर खुदरा ईंधन कीमतों पर नहीं दिखा है, लेकिन यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 80 डॉलर प्रति बैरल या उससे अधिक बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत
तेल कंपनियों ने 10 जुलाई को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे वाहन चालकों को फिलहाल अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया के हालात और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल पर आगे भी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
