नई दिल्ली: इजरायल और अमेरिका के बीच ईरान पर कथित हमले के बाद क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। मीडिया में वीडियो और रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान के तेहरान सहित अन्य इलाकों में बैलिस्टिक मिसाइलों से भारी तबाही की बात कही जा रही है। इन खबरों के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के सुरक्षाबल द्वारा सुरक्षित स्थान पर ले जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इजरायल के हमले में ईरान के वरिष्ठ कमांडर मारे गए हैं।
इन घटनाक्रमों के बीच ईरान की ओर से संभावित प्रतिशोध की कोशिशों को लेकर भी अलर्ट जारी किया गया है। ईरानी सुरक्षाबलों ने कथित तौर पर कहा है कि वे भी “अत्यधिक घातक” हमले कर सकते हैं, जिससे क्षेत्र में और भी तनाव बढ़ने की आशंकाएँ जताई जा रही हैं।
भारत ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी
इतना ही नहीं, इन संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने इजरायल में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। भारत ने अपने नागरिकों से कहा है कि वे “अत्यंत सावधानी बरतें और सतर्क रहें।” भारतीय नागरिकों को इजरायली अधिकारियों और गृह मोर्चा कमान (Home Front Command) द्वारा जारी किए जा रहे सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करने का भी निर्देश दिया गया है।
अब तक जारी एडवाइजरी में यह स्पष्ट किया गया है कि इजरायल में रहने वाले भारतीय नागरिकों को क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को देखते हुए हर समय अलर्ट रहना चाहिए और इजरायली सुरक्षा अधिकारियों के मार्गदर्शन का सख्ती से पालन करना चाहिए।
अमेरिका के बयान और युद्ध-विरोधी बयानबाज़ियाँ
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर कथित हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान भी सामने आए हैं। ट्रंप ने अपने ट्वीट और बयान में कहा है कि ईरान को “हथियार डालने या मौत का सामना करने” जैसे कड़े शब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी-इजरायली ऑपरेशन जारी रहेगा और खतरे का मुकाबला किया जाएगा।
कुछ प्रेस रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इजरायल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु-संबंधित ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे ईरान को बड़ा नुकसान पहुंचा है। इजरायल ने इस अभियान को “शील्ड ऑफ जुदाह” (Shield of Judah) का नाम दिया है और दोनों देश आगे भी सैन्य कार्रवाइयाँ जारी रख सकते हैं।
दुनिया की निगाहें इस विवाद पर टिकीं
इन घटनाओं के बीच पूरी दुनिया की नज़र इस क्षेत्रीय तनाव और संभावित दायरे पर बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक सूत्र और सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार बयान और विश्लेषण दे रहे हैं, क्योंकि इस तरह के संघर्ष का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
