नई दिल्ली। देश के करोड़ों बैंक खाताधारकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि बेसिक सेविंग्स बैंक डिपाजिट अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर किसी भी तरह की पेनल्टी नहीं लगाई जाती। ऐसे खातों में जीरो बैलेंस की सुविधा उपलब्ध है, जिसमें प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खोले गए खाते भी शामिल हैं।
जीरो बैलेंस पर भी मिलती हैं बैंकिंग सुविधाएं
वित्त मंत्री ने लिखित जवाब में बताया कि बेसिक सेविंग्स बैंक डिपाजिट अकाउंट में खाताधारकों को न्यूनतम बैलेंस रखने की बाध्यता नहीं होती। इसके बावजूद इन खातों में जमा और निकासी जैसी सामान्य बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। साथ ही खाताधारकों को एटीएम जैसी सुविधाएं भी मुफ्त में दी जाती हैं, जिससे आम लोगों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सके।
करीब 72 करोड़ खातों को मिल रहा फायदा
सीतारमण ने बताया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के खातों समेत देश में लगभग 72 करोड़ बेसिक सेविंग्स बैंक अकाउंट ऐसे हैं, जिनमें न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर किसी तरह का जुर्माना नहीं लगाया जाता। हालांकि अन्य प्रकार के खातों के मामले में बैंक अपनी बोर्ड से मंजूर नीति और भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार न्यूनतम मासिक औसत बैलेंस नहीं रखने पर पेनल्टी लगा सकते हैं।
मिनिमम बैलेंस न रखने पर बैंकों ने वसूले हजारों करोड़
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 से लेकर वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने न्यूनतम मासिक औसत बैलेंस नहीं रखने के कारण चालू और बचत खाताधारकों से कुल 8,092.83 करोड़ रुपये वसूले हैं।
बैंकों की आय में बेहद छोटा हिस्सा
उन्होंने कहा कि पिछले तीन वित्त वर्षों में वसूले गए 8,092.83 करोड़ रुपये उसी अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कुल आय का लगभग 0.23 प्रतिशत ही है। इससे स्पष्ट होता है कि इस प्रकार के शुल्क बैंकों की कुल आय का बहुत छोटा हिस्सा हैं।
कई बैंकों ने खत्म कर दिया न्यूनतम बैलेंस शुल्क
वित्त मंत्री के मुताबिक एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ने मार्च 2020 से बचत खाते में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर लगने वाले शुल्क को पूरी तरह खत्म कर दिया था। इसके अलावा वर्ष 2025 में नौ अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी इस तरह के शुल्क को माफ कर दिया है।
