धोलेरा SIR: मोदी की औद्योगिक सोच से सेमीकंडक्टर हब तक, 920 वर्ग किमी में बदल रही गुजरात की तस्वीर

अहमदाबाद/धोलेरा: गुजरात के अहमदाबाद से करीब 100 से 120 किलोमीटर दूर विकसित किया जा रहा धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (DSIR) अब सिर्फ प्रस्तावित स्मार्ट सिटी या औद्योगिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। करीब 920 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र भारत के उभरते औद्योगिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के प्रमुख केंद्रों में अपनी जगह बना रहा है। यह दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (DMIC) के प्रमुख नोड्स में शामिल है और यहां औद्योगिक निवेश के साथ आधुनिक कनेक्टिविटी व शहरी ढांचे को विकसित किया जा रहा है।

धोलेरा को लेकर मोदी के गुजरात दौर से चली आ रही औद्योगिक सोच

धोलेरा का विकास गुजरात में लंबे समय से चल रही औद्योगिक और शहरी विकास रणनीति का हिस्सा रहा है। नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौर से राज्य में औद्योगिक कॉरिडोर, बंदरगाह आधारित विकास और नए औद्योगिक शहरों की अवधारणा को आगे बढ़ाया गया।

हालांकि, धोलेरा को केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत परियोजना या निजी सपना बताना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। इसका संस्थागत विकास दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर, केंद्र सरकार, गुजरात सरकार और धोलेरा इंडस्ट्रियल सिटी डेवलपमेंट लिमिटेड (DICDL) जैसी संस्थाओं की संयुक्त प्रक्रिया के तहत हुआ है।

920 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र, लेकिन विकास चरणबद्ध

नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) के दस्तावेजों के मुताबिक DSIR करीब 920 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसके अंतर्गत 22 गांव आते हैं और छह टाउन प्लानिंग स्कीम के तहत करीब 422 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का नियोजित विकास किया गया है।

हालांकि पूरे 920 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक साथ निर्माण नहीं चल रहा है। शुरुआती चरण में 22.54 वर्ग किलोमीटर के एक्टिवेशन एरिया में ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। यहां सड़क, पानी, बिजली, आईसीटी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का नेटवर्क विकसित किया गया है।

धोलेरा की योजना में पहले औद्योगिक और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और उसके बाद बड़े निवेश को आकर्षित करने की रणनीति अपनाई गई है।

भूमिगत यूटिलिटी नेटवर्क बनेगा बड़ी पहचान

धोलेरा में शहरी सेवाओं को पारंपरिक शहरों से अलग तरीके से विकसित करने की योजना है। परियोजना के दस्तावेजों में गैस, आईसीटी, बिजली, पेयजल, रिसाइकल्ड वाटर, सीवेज और स्टॉर्म वाटर के लिए भूमिगत यूटिलिटी नेटवर्क का प्रावधान बताया गया है।

इसका मकसद भविष्य में बार-बार सड़कों की खुदाई की जरूरत को कम करना और औद्योगिक व आवासीय विस्तार के साथ यूटिलिटी क्षमता को बढ़ाना है।

मास्टर प्लान में औद्योगिक क्षेत्र के अलावा आवासीय, मिश्रित उपयोग, मनोरंजन, पर्यटन, ज्ञान एवं आईटी, सिटी सेंटर और लॉजिस्टिक्स के लिए भी अलग-अलग भूमि उपयोग निर्धारित किए गए हैं।

सेमीकंडक्टर फैब से बदली धोलेरा की पहचान

धोलेरा की कहानी में सबसे बड़ा बदलाव सेमीकंडक्टर उद्योग के आने के बाद दिखाई दिया है। केंद्र सरकार ने यहां टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की सेमीकंडक्टर फैब परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना का कुल निवेश करीब 91,526 करोड़ रुपये है और प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 50,000 वेफर स्टार्ट्स प्रति माह है।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत पात्र परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। यह परियोजना ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन (PSMC) के तकनीकी सहयोग से आगे बढ़ रही है।

मई 2026 में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और नीदरलैंड की एएसएमएल के बीच धोलेरा स्थित सेमीकंडक्टर फैब के लिए सहयोग समझौता भी हुआ। सितंबर 2026 की सरकारी जानकारी के अनुसार टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने बताया कि धोलेरा में 300 मिलीमीटर फैब का निर्माण निर्धारित दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इसके साथ ही सेमीकंडक्टर सप्लायर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 363 एकड़ के वेंडर पार्क की योजना भी सामने आई है।

21 हजार रोजगार वाले SEZ को मिली मंजूरी

अप्रैल 2026 में केंद्र सरकार ने धोलेरा में टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) को अधिसूचित किया। करीब 66.166 हेक्टेयर में फैले इस SEZ से लगभग 21 हजार रोजगार उपलब्ध होने की बात सरकारी दस्तावेज में कही गई है।

सेमीकंडक्टर फैब के साथ रसायन, गैस, उपकरण, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग, रखरखाव, परीक्षण और सप्लाई चेन से जुड़े सहायक उद्योगों के लिए भी अवसर बनने की संभावना है। इसी वजह से धोलेरा की पहचान अब स्मार्ट सिटी के साथ सेमीकंडक्टर और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के तौर पर भी बनने लगी है।

अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी को रफ्तार

किसी भी औद्योगिक शहर के लिए कनेक्टिविटी अहम भूमिका निभाती है। 109.019 किलोमीटर लंबा अहमदाबाद-धोलेरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे DSIR को अहमदाबाद और आसपास के क्षेत्रों से जोड़ता है।

फरवरी 2026 में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसे धोलेरा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर बताया था।

इसके अलावा मई 2026 में केंद्र सरकार ने अहमदाबाद (सरखेज)-धोलेरा सेमी हाई-स्पीड डबल लाइन रेल परियोजना को करीब 20,667 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी। लगभग 134 किलोमीटर लंबा यह रेल कॉरिडोर अहमदाबाद, धोलेरा SIR, प्रस्तावित धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल को जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। इसे 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

धोलेरा एयरपोर्ट भी होगा अहम कड़ी

धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना को भी पूरे औद्योगिक क्षेत्र की मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। जुलाई 2026 में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने एयरपोर्ट की प्रगति की समीक्षा की थी।

NICDC के अनुसार प्रस्तावित एयरपोर्ट DSIR से करीब 22 किलोमीटर दूर है। वहीं, निकटतम डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कनेक्शन करीब 97 किलोमीटर की दूरी पर बताया गया है। गुजरात के बंदरगाहों से कनेक्टिविटी भी धोलेरा की लॉजिस्टिक्स रणनीति का हिस्सा है।

रियल एस्टेट के लिए क्यों अहम है धोलेरा?

औद्योगिक निवेश बढ़ने के साथ किसी नए शहर में आवास, वाणिज्यिक जगह, होटल, वेयरहाउस, स्कूल, अस्पताल और दूसरी सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। धोलेरा की योजना में आवासीय और मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। ऐसे में औद्योगिक इकाइयों, कर्मचारियों और सेवा क्षेत्र के विस्तार के साथ रियल एस्टेट गतिविधियों के लिए भी संभावनाएं बन सकती हैं।

हालांकि औद्योगिक विकास की संभावनाओं और किसी खास जमीन या रियल एस्टेट निवेश से मिलने वाले रिटर्न को एक जैसा नहीं माना जा सकता। जमीन की कीमत, टाउन प्लानिंग स्कीम, वास्तविक इंफ्रास्ट्रक्चर, भूमि उपयोग, सरकारी मंजूरियां और परियोजना की समयसीमा जैसे कई कारक किसी संपत्ति की व्यवहारिक कीमत को प्रभावित करेंगे।

सेमीकंडक्टर के अलावा इन क्षेत्रों पर भी फोकस

धोलेरा की योजना केवल सेमीकंडक्टर उद्योग तक सीमित नहीं है। NICDC ने एयरोस्पेस एवं डिफेंस, सोलर कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन, फार्मास्यूटिकल्स एवं बायोटेक्नोलॉजी और हेवी इंजीनियरिंग को भी प्रमुख फोकस सेक्टर में शामिल किया है।

इसका उद्देश्य बड़े औद्योगिक निवेश, निर्यात, लॉजिस्टिक्स और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग को नियोजित शहरी ढांचे के साथ जोड़ना है।

2040 तक लाखों की आबादी और रोजगार का लक्ष्य

धोलेरा के दीर्घकालिक मास्टर प्लान में बड़े पैमाने पर औद्योगिक और शहरी विस्तार की परिकल्पना की गई है। पुराने परियोजना दस्तावेजों में 2040 तक 20 लाख आबादी और 8 लाख से अधिक रोजगार जैसे लक्ष्य दिए गए हैं।

इन आंकड़ों को मौजूदा उपलब्धि के बजाय दीर्घकालिक नियोजन लक्ष्य के रूप में देखना जरूरी है। अभी सबसे स्पष्ट प्रगति एक्टिवेशन एरिया, औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और खास तौर पर सेमीकंडक्टर परियोजना में दिखाई देती है।

धोलेरा के सामने बड़ी चुनौतियां भी

इतने बड़े ग्रीनफील्ड शहर को विकसित करना लंबी अवधि की प्रक्रिया है। भूमि विकास, पानी और ऊर्जा की उपलब्धता, पर्यावरण प्रबंधन, बाढ़ से सुरक्षा, औद्योगिक निवेश का वास्तविक क्रियान्वयन, कुशल मानव संसाधन और समय पर कनेक्टिविटी पूरी करना इसकी प्रगति के अहम कारक होंगे।

धोलेरा भौगोलिक रूप से नदियों और तटीय क्षेत्र के प्रभाव वाले इलाके में आता है। सरकारी दस्तावेजों में बाढ़ से सुरक्षा के लिए विशेष अध्ययन और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत का भी उल्लेख किया गया है।

आखिरकार धोलेरा की वास्तविक प्रगति इस बात से तय होगी कि घोषित योजनाओं और निवेश को कितनी तेजी से उत्पादन, रोजगार, निर्यात और एक सक्रिय औद्योगिक शहर में बदला जाता है।

 

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