आईएमएफ़ की भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘सी’ रेटिंग देने पर छिड़ा विवाद, जाने क्यों

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नयी दिल्ली। भारत सरकार ने घोषणा की है कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी 8.2 फ़ीसदी बढ़ी है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 5.6 फ़ीसदी की तुलना में काफी अधिक है। सरकार का कहना है कि यह वृद्धि भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से विकसित होती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करती है। सरकार ने अपने बयान में देश का अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बताया है।

इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) की ताज़ा समीक्षा में भारत के जीडीपी और राष्ट्रीय खातों (नेशनल अकाउंट्स) की गुणवत्ता को ‘सी’ रेटिंग दिए जाने पर राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। मुख्य सवाल यह है कि तेज़ी से बढ़ते विकास सूचकांकों के बीच आईएमएफ़ ने भारत के आंकड़ा ढांचे को कमज़ोर क्यों माना। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

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पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट कर सरकार से पूछा कि आखिर भारत के नेशनल अकाउंट्स स्टैटिस्टिक्स को आईएमएफ़ ने सी ग्रेड में क्यों रखा है। बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि यह रेटिंग तकनीकी कारणों से वर्षों से नहीं बदली है और इसकी जड़ें 2011-12 के आधार वर्ष में हैं। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने चिदंबरम पर “बेवजह डर फैलाने” का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस यह नहीं पचा पा रही कि भारत अब “फ़्रैजाइल फाइव” अर्थव्यवस्थाओं में शामिल नहीं है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि ग्रॉस फ़िक्स्ड कैपिटल फ़ॉर्मेशन में वृद्धि न होने और निजी निवेश की धीमी गति के कारण उच्च जीडीपी वृद्धि टिकाऊ नहीं मानी जा सकती।आईएमएफ़ की रेटिंग और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह बहस अब इस बात पर केंद्रित हो गई है कि भारत के विकास आंकड़ों की विश्वसनीयता और टिकाऊपन को कैसे मजबूत किया जाए।

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