प्रयागराज RTO में अवैध वसूली का मामला योगी दरबार पहुंचा, BJP नेता ने CM को भेजा शिकायती पत्र

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने का दावा करती है, लेकिन प्रयागराज के संभागीय परिवहन कार्यालय (RTO) में कथित भ्रष्टाचार और ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली का मामला अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं यमुनापार के जिला प्रतिनिधि अमित कुमार पाण्डेय ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर परिवहन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि प्रयागराज में परिवहन विभाग के कुछ अधिकारी कथित तौर पर संगठित गिरोह बनाकर ओवरलोड वाहनों का संचालन करवा रहे हैं। इसके एवज में ट्रांसपोर्टरों और वाहन संचालकों से बड़े पैमाने पर अवैध वसूली की जा रही है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस गतिविधि से न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सरकार और विभाग की छवि भी खराब हो रही है।

2500 ओवरलोड वाहनों की सूची सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा

शिकायत में सबसे गंभीर आरोप लगभग 2500 ओवरलोड वाहनों को लेकर लगाया गया है। अमित कुमार पाण्डेय के मुताबिक, इन वाहनों की सूची सोशल मीडिया पर प्रकाशित की गई है। उनका दावा है कि टोल प्लाजा और नैनी पुल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से इन वाहनों के आवागमन का सत्यापन किया जा सकता है।

पत्र में कहा गया है कि सितंबर और अक्टूबर महीने में सूची में शामिल 2500 वाहनों में से एक भी वाहन का चालान नहीं होना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि स्थानीय दलालों के माध्यम से कथित सांठगांठ कर ओवरलोड वाहनों को बिना कार्रवाई के गुजरने दिया जा रहा है और इसके बदले वसूली की जा रही है।

छह प्रवर्तन अधिकारियों की तैनाती, फिर भी नहीं रुक रही ओवरलोडिंग

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को बताया है कि प्रयागराज में छह प्रवर्तन अधिकारी तैनात हैं। इनमें एक प्रवर्तन अधिकारी ARTO के रूप में तैनात होने के बावजूद बड़ी संख्या में ओवरलोड वाहन नैनी पुल से गुजर रहे हैं। पत्र में सवाल उठाया गया है कि जब विभाग के पास पर्याप्त प्रवर्तन अधिकारी मौजूद हैं तो आखिर ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?

शिकायतकर्ता ने टोल प्लाजा और पुल पर लगे कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि इससे ओवरलोड वाहनों की आवाजाही और विभागीय कार्रवाई की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

नैनी पुल पर मंडरा रहा खतरा, 70 टन तक के वाहनों के गुजरने का आरोप

इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू नैनी पुल की सुरक्षा को लेकर उठाया गया है। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में दावा किया गया है कि करीब 70 टन वजन तक के ओवरलोड वाहन लगातार नैनी पुल से गुजर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो पुल को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

नैनी पुल प्रयागराज के यमुनापार क्षेत्र को शहर से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। पुल क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में लाखों लोगों के आवागमन पर असर पड़ सकता है। ऐसे में यह मामला केवल कथित भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।

ARTO आनंद प्रताप सिंह और विवेक शुक्ला पर लगाए गंभीर आरोप

शिकायती पत्र के दूसरे हिस्से में प्रयागराज में तैनात ARTO आनंद प्रताप सिंह का नाम लेते हुए आरोप लगाया गया है कि उनके ऑडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिनमें कथित तौर पर एंट्री और अवैध वसूली के ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े करोड़ों रुपये के लेनदेन की बात स्वीकार किए जाने का दावा किया गया है।

पत्र में आनंद प्रताप सिंह पर पहले भी विवादों में रहने और मुख्यालय में तैनाती के दौरान एक मामले में मारपीट के आरोपों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित मामलों की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

इसी तरह ARTO विवेक शुक्ला पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्र में दावा किया गया है कि झांसी, चित्रकूट और मिर्जापुर में तैनाती के दौरान भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें सामने आई थीं। शिकायतकर्ता ने इन मामलों की जांच कराकर पूरे नेटवर्क की भूमिका सामने लाने की मांग की है।

ट्रकों से प्रतिमाह 10,500 रुपये वसूली का आरोप

पत्र में कथित अवैध वसूली का एक विस्तृत आर्थिक गणित भी प्रस्तुत किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से ओवरलोड ट्रकों को संचालन की अनुमति देने के बदले प्रति ट्रक प्रतिमाह 10,500 रुपये तक वसूले जाने का आरोप है।

शिकायत में PTO मथिलेश सिंह का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि ओवरलोड ट्रकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती और कथित तौर पर कुछ ट्रकों को बंद करने की कार्रवाई भी चुनिंदा तरीके से होती है। यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ ट्रकों को बंद करने के बजाय केवल एक-दो टन की सजी हुई कार्रवाई दिखाकर जुर्माना वसूला जाता है।

पत्र में यह भी आरोप है कि जब किसी ट्रक को बंद किया जाता है तो उसके एवज में कथित तौर पर प्रतिमाह लाखों रुपये तक की वसूली होती है। शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों की संपत्ति, बैंक खातों और आय के स्रोतों की जांच कराने की मांग की है।

कानपुर, कौशांबी और फतेहपुर से वसूली का भी दावा

शिकायत में केवल प्रयागराज ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी कथित वसूली का नेटवर्क सक्रिय होने का आरोप लगाया गया है। पत्र के मुताबिक, कानपुर से करीब 3.50 लाख रुपये प्रतिमाह, कौशांबी से 1.50 लाख रुपये प्रतिमाह और फतेहपुर से 2.50 लाख रुपये प्रतिमाह वसूले जाने का दावा किया गया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित अधिकारियों के आवागमन और गतिविधियों की जांच की जाए तो कथित वसूली नेटवर्क की वास्तविकता सामने आ सकती है। उन्होंने होटल, गेस्ट हाउस और अन्य स्थानों पर होने वाली संदिग्ध बैठकों की भी जांच कराने की मांग की है।

जीरो टॉलरेंस नीति पर उठाए सवाल, छोटे कर्मचारियों को बनाया जा रहा मोहरा

अमित कुमार पाण्डेय ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि जब सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करती है तो फिर परिवहन विभाग में कथित तौर पर बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?

उन्होंने आरोप लगाया है कि ओवरलोड वाहनों के मामले में छोटे कर्मचारियों को कार्रवाई के नाम पर मोहरा बनाया जाता है, जबकि वास्तविक लाभ लेने वाले बड़े अधिकारियों तक जांच की आंच नहीं पहुंचती। उनका दावा है कि कुछ प्रभावशाली अधिकारी विभागीय जांच को प्रभावित करने और मामले को दबाने का प्रयास कर सकते हैं।

2027 विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है असर

शिकायती पत्र में इस मामले को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा गया है। अमित कुमार पाण्डेय ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया है कि भ्रष्टाचार के ऐसे आरोपों से सरकार की छवि प्रभावित हो सकती है। प्रयागराज और यमुनापार क्षेत्र में इसका राजनीतिक असर पड़ने की आशंका भी जताई गई है।

उन्होंने खुद को भाजपा का छोटा कार्यकर्ता और मुख्यमंत्री का समर्थक बताते हुए कहा है कि सरकार में बैठे लोगों और प्रयागराज के प्रशासनिक अधिकारियों को इस पूरे मामले की जानकारी देना उनका दायित्व है, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके और सरकार की छवि को नुकसान न पहुंचे।

मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच और कठोर कार्रवाई की मांग

भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रयागराज परिवहन विभाग में कथित अवैध वसूली के पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। ओवरलोड वाहनों की सूची का सत्यापन टोल प्लाजा और नैनी पुल के सीसीटीवी कैमरों से कराया जाए। संबंधित ARTO, PTO और अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच हो। कथित वसूली नेटवर्क, स्थानीय दलालों और ट्रांसपोर्टरों के बीच संबंधों का पता लगाया जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।

अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस गंभीर शिकायत पर क्या संज्ञान लेता है और प्रयागराज के परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार तथा ओवरलोड वाहनों के संचालन को लेकर जांच कब शुरू होती है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर छह प्रवर्तन अधिकारियों की तैनाती के बावजूद यदि हजारों ओवरलोड वाहन सड़कों और नैनी पुल से गुजर रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

Related posts