नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद दक्षिण एशिया की राजनीति और व्यापार समीकरणों में हलचल तेज हो गई है। भारत को अमेरिकी बाजार में कम टैरिफ का फायदा मिलने के बाद अब बांग्लादेश में चिंता गहराती दिख रही है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका और बांग्लादेश के बीच 9 फरवरी को एक अहम ट्रेड एग्रीमेंट साइन होने जा रहा है, जिसकी शर्तों को लेकर गोपनीयता बरती जा रही है।
यह डील ऐसे समय पर सामने आ रही है, जब बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। चुनाव से ठीक पहले होने जा रही इस ‘सीक्रेट’ ट्रेड डील को लेकर देश के भीतर सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट के बाद बांग्लादेश ने जल्दबाजी में अमेरिका के साथ समझौता फाइनल करने का फैसला किया है। हाल ही में अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जिससे बांग्लादेश की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर होने का खतरा बढ़ गया है।
भारत से मार्केट शेयर खोने का डर
बांग्लादेश को आशंका है कि अगर वह अमेरिका से भारत जैसी या उससे बेहतर शर्तें हासिल नहीं कर पाया, तो अमेरिकी बाजार में उसका हिस्सा भारत के हाथ चला सकता है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर रेडीमेड गारमेंट (RMG) एक्सपोर्ट पर निर्भर है। अमेरिका को होने वाला यह निर्यात उसके कुल अमेरिकी एक्सपोर्ट का लगभग 90 प्रतिशत है।
टैरिफ में पहले भी हुई है भारी कटौती
यह प्रस्तावित डील उस समय सामने आई है, जब अप्रैल 2025 में अमेरिका ने बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगाया था। इसके बाद जुलाई में बातचीत के जरिए टैरिफ घटाकर 35 प्रतिशत किया गया और अगस्त में इसे 20 प्रतिशत तक लाया गया। अब नए ट्रेड एग्रीमेंट के तहत टैरिफ को और कम कर 15 प्रतिशत तक लाने की उम्मीद जताई जा रही है।
गोपनीय समझौते पर उठे सवाल
2025 के मध्य में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अमेरिका के साथ एक औपचारिक नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत टैरिफ और व्यापार से जुड़ी सभी बातचीत को गोपनीय रखने का वादा किया गया। इस समझौते का कोई ड्राफ्ट न तो संसद के साथ साझा किया गया और न ही आम जनता या प्रमुख उद्योग संगठनों को इसकी जानकारी दी गई।
डील में शामिल अमेरिकी शर्तें
इस ट्रेड डील में कई सख्त शर्तें शामिल होने की बात सामने आ रही है। इनमें चीन से आयात कम करना और उसकी जगह अमेरिका से सैन्य उपकरणों का आयात बढ़ाना प्रमुख है। इसके अलावा अमेरिकी उत्पादों को बांग्लादेश में बिना किसी प्रतिबंध के प्रवेश देने और अमेरिकी मानकों व सर्टिफिकेशन को बिना सवाल स्वीकार करने की शर्त भी शामिल है।
अमेरिका चाहता है कि उसकी गाड़ियों और ऑटो पार्ट्स के आयात पर बांग्लादेश में किसी तरह का निरीक्षण न हो, ताकि अमेरिकी वाहन आसानी से स्थानीय बाजार में प्रवेश कर सकें।
विशेषज्ञों ने जताई पारदर्शिता की कमी
प्राइवेट रिसर्च संगठन सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग (CPD) के वरिष्ठ फेलो देवप्रिया भट्टाचार्य ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि यह ट्रेड डील पारदर्शी नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसके फायदे और नुकसान पर न तो सार्वजनिक चर्चा हुई और न ही उद्योग जगत को अपनी राय रखने का मौका मिला।
चूंकि यह समझौता एक गैर-निर्वाचित अंतरिम सरकार द्वारा चुनाव से ठीक तीन दिन पहले साइन किया जा रहा है, ऐसे में इसे लागू करने की जिम्मेदारी नई चुनी हुई सरकार पर आएगी, जो भविष्य में राजनीतिक और आर्थिक विवाद का कारण बन सकती है।
