Abdominal Obesity: भारत में महिलाओं में तेजी से बढ़ रही पेट की चर्बी, हर दूसरी महिला खतरे में

नई दिल्ली: भारत में महिलाओं के बीच पेट की चर्बी यानी एब्डॉमिनल ओबेसिटी तेजी से बढ़ती हुई एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। हालिया अध्ययन में सामने आया है कि 30 से 49 वर्ष की उम्र की हर 10 में से 5 से 6 महिलाएं पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी से प्रभावित हैं। यह स्थिति न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि आने वाले समय में बड़े स्तर पर बीमारियों का कारण भी बन सकती है।

शोध में सामने आए चौंकाने वाले ट्रेंड
यह अध्ययन जर्नल Diabetes and Metabolic Syndrome: Clinical Research and Reviews में प्रकाशित हुआ है, जिसमें बताया गया है कि भारत में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की कमर का आकार अधिक तेजी से बढ़ रहा है। इसे एक छिपे हुए मेटाबॉलिक संकट के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। चिंता की बात यह भी है कि यह समस्या अब किशोरों और युवाओं, खासकर लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रही है।

जीवनशैली और पोषण से जुड़ा है बड़ा कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समस्या के पीछे कई कारण हैं, जिनमें उम्र बढ़ना, शहरी जीवनशैली, अधिक आय और नॉन-वेज भोजन शामिल हैं। इसके अलावा बचपन में पोषण की कमी और बाद में अचानक बदलती जीवनशैली भी पेट की चर्बी बढ़ने का बड़ा कारण मानी जा रही है।

गंभीर बीमारियों का बढ़ता खतरा
पेट के आसपास जमा चर्बी कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकती है। इनमें दिल की बीमारी, किडनी से जुड़ी समस्याएं, फैटी लिवर (MASLD), टाइप-2 डायबिटीज और कुछ प्रकार के कैंसर जैसे ब्रेस्ट कैंसर शामिल हैं। ऐसे में समय रहते इसकी पहचान और नियंत्रण बेहद जरूरी हो जाता है।

BMI से नहीं चलता सही पता, कमर मापना जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बॉडी मास इंडेक्स यानी BMI के आधार पर मोटापे का सही आकलन नहीं किया जा सकता, खासकर भारतीयों में। कई मामलों में कम BMI होने के बावजूद शरीर में फैट ज्यादा होता है। इसलिए अब कमर का घेरा और कमर-से-लंबाई अनुपात को ज्यादा प्रभावी मापदंड माना जा रहा है। अच्छी बात यह है कि इसे घर पर साधारण टेप की मदद से आसानी से मापा जा सकता है।

ग्रामीण भारत भी तेजी से चपेट में
यह समस्या अब सिर्फ शहरों या संपन्न वर्ग तक सीमित नहीं रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेट की चर्बी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। NFHS-5 (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में करीब 40 प्रतिशत महिलाएं और 12 प्रतिशत पुरुष इस समस्या से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है that संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के जरिए इस बढ़ती समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

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