भुवनेश्वर। ओडिशा के छह दिवसीय दौरे पर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को पहली बार जाजपुर पहुंचीं। यहां उन्होंने मां बिरजा मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और अपने पितृपुरुषों के उद्देश्य से पिंडदान किया। राष्ट्रपति के इस धार्मिक अनुष्ठान को 16 ब्राह्मणों और 32 सेवकों ने विधि-विधान के साथ संपन्न कराया। पूजा कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति कुछ समय के लिए आराम कक्ष में ठहरीं और फिर बालेश्वर के लिए रवाना हो गईं।
पूजा के बाद बालेश्वर और पुरी का कार्यक्रम
मां बिरजा मंदिर में पूजा-अर्चना और पिंडदान के बाद राष्ट्रपति बालेश्वर पहुंचीं, जहां उन्होंने फकीर मोहन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। इसके बाद वह वायुसेना के विशेष विमान से पुरी के लिए रवाना हो गईं। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर भुवनेश्वर, जाजपुर, बालेश्वर और पुरी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इस दौरान ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरिबाबू कंभमपति भी राष्ट्रपति के साथ मौजूद रहे।
राष्ट्रपति की एक झलक पाने को उमड़ी भीड़
निर्धारित कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति का काफिला भुवनेश्वर राजभवन से एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ, जहां से वह विशेष विमान से जाजपुर पहुंचीं। जाजपुर एयर स्ट्रिप से मां बिरजा मंदिर जाते समय सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग राष्ट्रपति की एक झलक पाने के लिए खड़े नजर आए। लोगों का कहना था कि देश की राष्ट्रपति को इतने करीब से देखने का अवसर बार-बार नहीं मिलता। राष्ट्रपति ने भी हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया।
फूलों से सजा मां बिरजा मंदिर, आम दर्शन बंद
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर मां बिरजा मंदिर को भव्य तरीके से फूलों से सजाया गया था। सुरक्षा कारणों से मंदिर में आम भक्तों के दर्शन बंद कर दिए गए थे। हालांकि राष्ट्रपति के आगमन से पहले ही सुबह करीब सात बजे से मंदिर के आसपास लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। हाथों में प्लेकार्ड लिए लोग अपनी ‘उत्कल प्रांत की बेटी’ के स्वागत के लिए उत्साह के साथ खड़े दिखाई दिए।
बच्चों को चॉकलेट, सेवक-पुजारियों के लिए खास दिन
मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद राष्ट्रपति ने वहां मौजूद छोटे बच्चों को चॉकलेट भी बांटी। सभी धार्मिक अनुष्ठान पूरे करने के बाद राष्ट्रपति का काफिला हेलीपैड पहुंचा, जहां से वह बालेश्वर के लिए रवाना हो गईं। मंदिर के सेवकों और पुजारियों ने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण और अविस्मरणीय दिन बताया। उनका कहना है कि एक आम श्रद्धालु की तरह राष्ट्रपति ने मां बिरजा का पूजन किया और अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान किया, जिसे वे हमेशा याद रखेंगे।
