यूपी: दो हाई स्पीड रेल कॉरिडोर, हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल

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पर्यटन, एमएसएमई और टेक्सटाइल को भी मिलेगा बढ़ावा, खुलेंगे रोजगार के नए द्वार

प्रदेश में 12.2 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर से इन्फास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट में उत्तर प्रदेश के विकास और बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट मिले हैं। इस बजट में राज्य के आर्थिक, औद्योगिक व सामाजिक परिदृश्य को सशक्त करने वाली कई दूरगामी घोषणाएं भी की गई हैं। यहां हर जिले में गर्ल्स हॉस्लत भी बनाए जाएंगे। आधुनिक कनेक्टिविटी, बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश व रोजगारोन्मुखी योजनाओं से उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय विकास में अपनी भूमिका निभा सकेगा।

केंद्रीय बजट में घोषित 7 हाई- स्पीड रेल कॉरिडोर में से दो महत्वपूर्ण कॉरिडोर सीधे उत्तर प्रदेश से जुड़े हैं, जिनमें दिल्ली – वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रमुख हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से राजधानी दिल्ली से काशी, पूर्वांचल और आगे पूर्वी भारत तक की रेलयात्रा तेज, सुरक्षित, सुविधाजनक तरीके से संपन्न होगी और आधुनिक तकनीक से लैस रेल कनेक्टिविटी बढ़ेगी। हाई-स्पीड रेल से लंबी दूरी की यात्रा का समय काफी कम होगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियों, औद्योगिक निवेश व पर्यटन को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

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काशी, पूर्वांचल व सीमावर्ती जिलों में उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था अधिक मजबूत होगी। साथ ही, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को गति मिलने से होटल, ट्रांसपोर्ट, टूरिस्ट गाइड जैसे स्थानीय व्यवसायों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। बजट में भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ तथा हस्तिनापुर को देश के 15 प्रमुख पुरातात्विक पर्यटन स्थलों के विकास कार्यक्रम में शामिल किया जाना उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है।

इससे न केवल यूपी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर नई मजबूती मिलेगी। केंद्रीय बजट में देशभर में इन्फास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए 12.2 लाख करोड़ के रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर की घोषणा की गई है, जिसका सीधा व अप्रत्यक्ष लाभ उत्तर प्रदेश को मिलेगा ।

सिटी इकोनॉमिक रीजन से शहरों का होगा विकास
केंद्रीय बजट 2026-27 में टियर-2 और टियर-3 शहरों को विकास की मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) योजना की शुरुआत की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत बड़े महानगरों पर निर्भरता कम करते हुए पांच लाख से ज्यादा आबादी वाले अन्य शहरों में बुनियादी ढांचे व आर्थिक गतिविधियों को सुदृढ़ किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और झांसी जैसे प्रमुख शहरों को इस योजना का सीधा लाभ मिल सकता है।

वाराणसी को मिलेगा जल परिवहन का नया आयाम
केंद्रीय बजट में वाराणसी में इनलैंड वॉटरवेज शिप रिपेयर इकोसिस्टम स्थापित किए जाने की घोषणा की गई है। इस शिप रिपेयर इकोसिस्टम के स्थापित होने से मालवाहक जहाजों और जलपोतों के रखरखाव व मरम्मत की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगी, जिससे समय और लागत दोनों में कमी आएगी। इससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

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