सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय एजेंसी को दी पूरी आजादी, इंटरपोल से भी ले सकती है मदद
राज्य सरकारें जल्द स्थापित करें साइबर क्राइम सेंटर
रिजर्व बैंक को पक्षकार बनाते हुए जारी किया नोटिस
नई दिल्ली। साइबर अपराध से जुड़े डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट फर्जीवाड़े पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। इससे संबंधित दर्ज मामलों की जांच सीबीआई करेगी। ऐसे मामलों की जांच के लिए सीबीआई को विशेष अधिकार दिये गए हैं। कोर्ट ने कहा कि जहां भी साइबर अपराध में उपयोग किए गए बैंक खातों का पता चलता है, वहां संबंधित बैंकरों कीजांच के लिए सीबीआई को पूरी आजादी होगी। वह इंटरपोल से भी मदद ले सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अन्य स्कैम से अलग सीबीआई सबसे पहले डिजिटल अरेस्ट स्कैम के मामलों की जांच करेगी। सीजेआई सूर्यकांत ने एजेंसी को अधिक अधिकार देते हुए सीबीआई को (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पीसीए के तहत बैंकरों की भूमिका की जांच करने की पूरी आज़ादी दी। जहां ऐसे डिजिटल अरेस्ट फर्जीवाड़े के मकसद से बैंक अकाउंट खोले गए हैं।
कोर्ट ने रिजर्व बैंक को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि जिन राज्यों ने सीबीआई को जांच की सामान्य सहमति नहीं दे रखी है, वहभी अपने यहां दर्ज डिजिटल अरेस्ट के केस सीबीआई को सौंप दें और साइबर क्राइम सेंटर खोलें। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच पर यह निर्देश दिए।
क्या है मामला
सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर को अंबाला के एक बुजुर्ग दंपति को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे एक करोड़ रुपये से ज्यादा की उगाही करने की घटना पर स्वतः संज्ञान लिया था। बुजुर्ग दंपति ने तत्कालीन चीफ जस्टिस बीआर गवई को पत्र लिखकर इस जालसाजी के बारे में बताया था। कोर्ट ने कहा था कि ये मामला गंभीर है। इसमें केंद्र और राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय की जरुरत है।
सिम कार्ड के गलत इस्तेमाल रोकने के भी आदेश
पीठ ने कहा कि एक ही नाम पर कई सिम जारी होना चिंताजनक है । दूरसंचार विभाग इससे निपटने के उपाय बताए। टेलीकॉम कंपनियों पर इसे लेकर सख्ती हो। आईटी रूल्स, 2021 के तहत आने वाली सभी संस्थाएं जांच में सहयोग करें। ठगी में इस्तेमाल संदिग्ध नंबर का डेटा सुरक्षित रखा जाए और जांच एजेंसी को उपलब्ध करवाया जाए।
