लखनऊ। राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में करीब आठ साल बाद अदालत ने गुरुवार को अपना फैसला सुना दिया। जिला जज की अदालत ने एप्पल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की मौत के मामले में तत्कालीन सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार दिया। वहीं, दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण बरी कर दिया गया। अदालत ने प्रशांत चौधरी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304(2) के तहत दोषी माना है। अब उसकी सजा पर सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
29 सितंबर 2018 की रात क्या हुआ था?
यह मामला 29 सितंबर 2018 की देर रात का है। एप्पल कंपनी में एरिया सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान के साथ कार से लौट रहे थे। दोनों गोमतीनगर विस्तार इलाके में मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास पहुंचे थे।
इसी दौरान गश्त पर मौजूद सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया। पुलिस की ओर से बताया गया था कि कार नहीं रुकी और सिपाहियों को टक्कर मारने की स्थिति बनी। इसी दौरान प्रशांत चौधरी ने गोली चला दी। गोली विवेक तिवारी को लगी और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
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विवेक तिवारी की मौत के बाद यह मामला देखते ही देखते पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली, आम नागरिकों पर बल प्रयोग और पुलिस जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
दोनों सिपाहियों पर हुई थी कार्रवाई
घटना के बाद विवेक तिवारी की सहकर्मी सना खान की तहरीर पर गोमतीनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। दोनों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर निलंबित कर दिया गया था। बाद में मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई। जांच पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया और मामला लखनऊ की अदालत में पहुंचा।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद 6 अगस्त 2026 को मामले में अंतिम बहस पूरी हुई थी। इसके बाद अदालत ने 17 सितंबर को फैसला सुनाया।
प्रशांत दोषी, संदीपसाक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी प्रशांत चौधरी को धारा 302 के बजाय धारा 304(2), यानी गैर-इरादतन हत्या के तहत दोषी माना। वहीं, दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर बरी कर दिया गया।अदालत के इस फैसले के बाद अब प्रशांत चौधरी की सजा को लेकर अगली सुनवाई पर सबकी नजरें हैं।

फैसले से संतुष्ट नहीं हैं कल्पना तिवारी
अदालत के फैसले के समय विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी भी मौजूद थीं। फैसला आने के बाद उन्होंने नाराजगी जताई। कल्पना ने कहा कि परिवार को उम्मीद थी कि अदालत से न्याय मिलेगा, लेकिन फैसला उनकी अपेक्षा के अनुरूप नहीं आया। उन्होंने फैसले को स्वीकार करने से इनकार करते हुए ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही है।
कल्पना का कहना है कि प्रशांत चौधरी एक प्रशिक्षित पुलिसकर्मी था और गोली चलाने की घटना को महज गलती के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि घटना के समय मौके पर मौजूद दूसरे सिपाही संदीप कुमार को किस आधार पर बरी किया गया।
परिवार का कहना है कि करीब आठ वर्षों से वे न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब अदालत के फैसले के बाद परिवार आगे की कानूनी लड़ाई जारी रखने की तैयारी में है।
अब सजा पर होगी सुनवाई
अदालत ने प्रशांत चौधरी को दोषी तो करार दे दिया है, लेकिन सजा की अवधि का ऐलान अभी बाकी है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार सजा पर सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होनी है। इसके बाद यह भी स्पष्ट होगा कि दोषी को कितनी सजा दी जाती है।
करीब आठ साल पहले हुई इस घटना ने पुलिस की जवाबदेही और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी थी। अब अदालत के फैसले के बाद मामले की अगली अहम कड़ी प्रशांत चौधरी की सजा और उसके बाद संभावित अपील की कानूनी प्रक्रिया होगी।
