नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल गेन टैक्स में संशोधन करते हुए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया है। हालांकि, पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का यह कदम वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार डीजल के निर्यात पर लगने वाला विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इससे पहले यह 13.5 रुपये प्रति लीटर था। वहीं एटीएफ के निर्यात पर एसएईडी को 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
पेट्रोल पर नहीं बढ़ाया गया शुल्क
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है। पेट्रोल पर निर्यात शुल्क पहले की तरह 1.5 रुपये प्रति लीटर ही बना रहेगा। इसके साथ ही घरेलू खपत के लिए इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में भी कोई संशोधन नहीं किया गया है।
इसका मतलब है कि इस फैसले का सीधा असर देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर नहीं पड़ेगा और आम उपभोक्ताओं को तत्काल किसी अतिरिक्त बोझ का सामना नहीं करना होगा।
हर 15 दिन में होती है समीक्षा
विंडफॉल गेन टैक्स की समीक्षा सरकार द्वारा नियमित रूप से प्रत्येक 15 दिन में की जाती है। इसका निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन और वैश्विक मांग-आपूर्ति की स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है।
सरकार समय-समय पर इन शुल्कों में बदलाव कर घरेलू बाजार और निर्यात के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास करती है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ीं कच्चे तेल की कीमतें
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने 26 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क लागू किया था। इसके बाद 16 मई को पेट्रोल के निर्यात पर भी शुल्क लगाया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के कारण निर्यातकों को अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना रहती है। ऐसे में सरकार विंडफॉल टैक्स के माध्यम से उस अतिरिक्त कमाई का एक हिस्सा राजस्व के रूप में प्राप्त करती है।
घरेलू उपलब्धता बनाए रखना सरकार का लक्ष्य
सरकार का कहना है कि विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य केवल अतिरिक्त मुनाफे पर नियंत्रण करना नहीं है, बल्कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है।
पश्चिम एशिया संकट के चलते वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में निर्यात को नियंत्रित कर घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है।
निर्यातकों के लिए बढ़ेगी लागत
डीजल और एटीएफ पर शुल्क बढ़ने से निर्यात करने वाली कंपनियों की लागत में वृद्धि हो सकती है। हालांकि घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता और मूल्य स्थिरता को देखते हुए सरकार इस कदम को आवश्यक मान रही है।
