ऑफिस में अपमानजनक और नस्लभेदी टिप्पणी करना एक कंपनी को महंगा पड़ गया। आयरिश मूल की एक महिला को अपने बॉस की लगातार अपमानजनक टिप्पणियों के बाद अदालत से करीब 29 लाख रुपये (23,526 पाउंड) का मुआवजा मिला है। मामला यूनाइटेड किंगडम के शहर लीड्स का है, जहां एक सिविल इंजीनियरिंग कंपनी में काम करने वाली महिला ने अपने वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ नस्लीय उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। सुनवाई के बाद अदालत ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया।
‘आलू’ कहकर उड़ाया जाता था मजाक
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला बर्नाडेट हेस एक सिविल इंजीनियरिंग कंपनी में बुककीपर के पद पर कार्यरत थीं। उनका आरोप था कि उनके बॉस मिक एटकिंस अक्सर उनकी आयरिश पहचान का मजाक उड़ाते थे। महिला ने बताया कि जब भी किसी बात पर मतभेद होता, तो उनका बॉस जोर से ‘पोटैटो’ यानी ‘आलू’ कहकर उन्हें चिढ़ाता था। इसके अलावा उनके सामने ‘पैडी’ और ‘स्टूपिड पैडी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया जाता था, जिससे वह लगातार अपमानित महसूस करती थीं।
कोर्ट ने माना नस्लीय उत्पीड़न
मामले की सुनवाई के दौरान रोजगार न्यायाधिकरण ने पाया कि यह व्यवहार नस्लीय उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। सुनवाई के बाद न्यायाधीश बकले ने कहा कि ऐसे शब्दों का बार-बार इस्तेमाल किसी भी आयरिश मूल के व्यक्ति के लिए बेहद अपमानजनक हो सकता है। अदालत ने माना कि इस तरह की टिप्पणियों ने महिला के लिए कार्यस्थल का माहौल अपमानजनक, डराने वाला और असहज बना दिया था।
महिला ने बताया मानसिक तनाव का असर
महिला ने अदालत में बताया कि यह स्थिति करीब छह महीने तक जारी रही। इस दौरान वह रोज ऑफिस जाने से पहले गहरे तनाव में रहती थीं। उन्होंने कहा कि यह अनुभव ऐसा था मानो उन्हें बार-बार छोटे-छोटे घाव लग रहे हों। ऑफिस जाने से पहले उन्हें शारीरिक रूप से भी असहज महसूस होने लगा था। महिला के अनुसार इस व्यवहार ने उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास पर गंभीर असर डाला।
मजबूरी में नहीं छोड़ सकीं नौकरी
महिला ने अदालत को बताया कि आर्थिक जरूरतों के कारण वह तुरंत नौकरी छोड़ने की स्थिति में नहीं थीं। इसी वजह से उन्होंने लंबे समय तक यह सब सहा। बाद में उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया और मामला अदालत तक पहुंचा। सुनवाई के बाद अदालत ने महिला के पक्ष में फैसला देते हुए कंपनी को करीब 29 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
