क्या ईरान के हमले से पीछे हट गया अमेरिकी युद्धपोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’? जानिए वायरल दावे की सच्चाई

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन लगातार चर्चा में है। लगभग 333 मीटर लंबा और 77 मीटर चौड़ा यह विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर 65 से अधिक लड़ाकू विमानों को साथ ले जाने की क्षमता रखता है। इसी वजह से इसे अक्सर “चलता-फिरता सैन्य अड्डा” भी कहा जाता है।

हाल ही में ईरान समर्थक सोशल मीडिया हैंडल्स पर यह दावा किया गया कि ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों के डर से यह अमेरिकी युद्धपोत अपनी तैनाती वाली जगह से हजारों किलोमीटर दूर हट गया है। हालांकि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इस दावे की पुष्टि नहीं हो पाई है।

जंग की शुरुआत के बाद से बढ़ी चर्चा

बताया जाता है कि जनवरी के आखिर में यह युद्धपोत ईरान के करीब पहुंचा था। इसके बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ गया। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद यह युद्धपोत फिर सुर्खियों में आ गया।

ईरान ने दावा किया था कि युद्ध शुरू होने के अगले ही दिन उसने इस युद्धपोत पर चार मिसाइलें दागी थीं, लेकिन अमेरिका ने उस दावे को झूठा करार दिया था।

ईरान का नया दावा क्या है

अब ईरान समर्थक सोशल मीडिया खातों से यह दावा किया जा रहा है कि ईरानी हमलों के कारण अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर अपनी मूल स्थिति से करीब एक हजार किलोमीटर दूर चला गया है।

ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के एक प्रवक्ता के हवाले से कहा गया कि यह युद्धपोत होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के समुद्री क्षेत्र से हट गया है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रवक्ता का कहना है कि ईरानी नौसेना के ड्रोन हमले के बाद यह जहाज अपने डिस्ट्रॉयर के साथ पीछे हट गया।

क्या है इस दावे की सच्चाई

ईरान की ओर से किए जा रहे इन दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। समुद्री जहाजों को ट्रैक करने वाली वेबसाइट पर 9 मार्च को कुछ समय के लिए इस युद्धपोत की लोकेशन दिखाई दी थी, लेकिन उसके बाद इसे ट्रैक नहीं किया जा सका।

विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध की स्थिति में नौसेना के बड़े जहाज अक्सर अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर देते हैं, ताकि उनकी सटीक लोकेशन सार्वजनिक न हो सके। इसलिए केवल ट्रैकिंग बंद होने के आधार पर यह कहना संभव नहीं है कि जहाज अपनी जगह छोड़कर भाग गया है।

वीडियो में दिखे लड़ाकू विमान

9 मार्च को ही एक व्यापारी जहाज के नाविकों ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें इस युद्धपोत से लड़ाकू विमान उड़ान भरते हुए दिखाई दे रहे थे। इससे संकेत मिलता है कि जहाज सामान्य सैन्य गतिविधियों में लगा हुआ था।

क्यों मुश्किल है ऐसे हमले का सफल होना

सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक एयरक्राफ्ट कैरियर कभी अकेले नहीं चलते। उनके साथ कई युद्धपोत, पनडुब्बियां और लड़ाकू विमानों का पूरा समूह होता है, जिसे कैरियर बैटल ग्रुप कहा जाता है।

ऐसे में किसी भी मिसाइल या ड्रोन को मुख्य जहाज तक पहुंचने से पहले कई सुरक्षा परतों को पार करना पड़ता है, जो बेहद कठिन होता है।

अमेरिकी कमांड ने भी जारी की थीं तस्वीरें

7 मार्च को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अरब सागर में मौजूद इस युद्धपोत की तस्वीरें साझा की थीं। इन तस्वीरों के साथ कहा गया कि ईरानी दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते।

इन तथ्यों के आधार पर फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिकी युद्धपोत ईरानी हमलों के डर से पीछे हट गया है।

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