नेपाल की राजनीति में एक चौंकाने वाला और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। 35 वर्षीय रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह ने चार बार प्रधानमंत्री रह चुके दिग्गज नेता केपी शर्मा ओली को उनके ही मजबूत गढ़ में हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया है। इस जीत ने नेपाल की राजनीति में नई बहस और नए नेतृत्व की संभावनाओं को जन्म दे दिया है।
झापा-5 सीट पर हुए मुकाबले में बालेंद्र शाह ने केपी शर्मा ओली को 49,614 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव परिणामों के अनुसार शाह को 68,348 वोट मिले, जबकि ओली को केवल 18,734 वोट हासिल हुए। 74 वर्षीय अनुभवी नेता को उनकी पारंपरिक सीट पर हराना अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। खास बात यह है कि बालेंद्र शाह कुछ समय पहले ही काठमांडू के मेयर बने थे और अब उन्होंने सीधे राष्ट्रीय राजनीति में उतरकर यह बड़ी जीत दर्ज की है।
राजनीतिक भविष्य दांव पर लगाकर लड़ा चुनाव
बालेंद्र शाह ने केपी शर्मा ओली के खिलाफ चुनाव लड़ते समय अपना पूरा राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा दिया था। उन्होंने काठमांडू के मेयर पद से इस्तीफा देकर सीधे संसदीय चुनाव में उतरने का फैसला किया और देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक को चुनौती दी।
दिग्गज मार्क्सवादी नेता के खिलाफ यह जीत नेपाल के हाई-प्रोफाइल संसदीय चुनाव के सबसे प्रतीकात्मक नतीजों में से एक मानी जा रही है। यह चुनाव उस समय हुआ जब देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के बाद सरकार गिर गई थी। ऐसे माहौल में शाह का यह कदम एक बड़ा राजनीतिक जोखिम था, लेकिन अब उनकी जीत ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। यदि उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को संसद में बहुमत मिलता है तो उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना भी मजबूत मानी जा रही है।
कौन हैं बालेंद्र शाह
बलेन के नाम से लोकप्रिय 35 वर्षीय बालेंद्र शाह नेपाल में युवाओं के बीच बदलाव की राजनीति के प्रतीक बनकर उभरे हैं। उनका जन्म 1990 में काठमांडू में हुआ था। जब नेपाल में 1996 से 2006 के बीच माओवादी गृहयुद्ध चल रहा था, उस समय शाह स्कूली छात्र थे। इस दस साल लंबे संघर्ष में हजारों लोगों की जान गई और अंततः देश में राजशाही का अंत हो गया।
बालेंद्र शाह ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन उन्हें पहचान नेपाल के अंडरग्राउंड हिप-हॉप संगीत से मिली। अपने गीतों के जरिए उन्होंने भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता और राजनीतिक व्यवस्था की आलोचना जैसे मुद्दों को लगातार उठाया, जिससे युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।
देशभर में मजबूत प्रदर्शन करती दिख रही है पार्टी
रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह की यह जीत केवल एक सीट तक सीमित नहीं मानी जा रही है। चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक उनकी पार्टी देशभर में मजबूत प्रदर्शन करती दिखाई दे रही है और कई सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
275 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में उनकी पार्टी बहुमत की ओर बढ़ती नजर आ रही है, हालांकि मतगणना अभी पूरी नहीं हुई है। एक युवा मेयर से संभावित प्रधानमंत्री तक का यह सफर हाल के वर्षों में नेपाल की राजनीति के सबसे नाटकीय घटनाक्रमों में गिना जा रहा है।
प्रदर्शनों के बाद गिर गई थी सरकार
दरअसल सितंबर 2025 में नेपाल में युवाओं के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। शुरुआत एक छोटे सोशल मीडिया प्रतिबंध के विरोध से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे यह आंदोलन भ्रष्टाचार और आर्थिक मुश्किलों जैसे बड़े मुद्दों पर केंद्रित हो गया।
इन हिंसक प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 77 लोगों की मौत हुई थी। हालात इतने बिगड़ गए थे कि आखिरकार केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई। इसके बाद देश में नए संसदीय चुनाव कराए गए, जिनमें यह बड़ा राजनीतिक उलटफेर सामने आया।
