वॉशिंगटन: अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले संघीय चुनाव आयोग (FEC) की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग प्रणाली साइबर हमले की कोशिशों के बीच ठप हो गई है। आयोग ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि उसकी वेब आधारित सेवाएं अस्थायी रूप से बंद हैं और तकनीकी टीम उन्हें बहाल करने में जुटी है। इस व्यवधान के कारण राजनीतिक दलों और चुनावी समितियों को अनिवार्य चुनावी खर्च की रिपोर्ट दाखिल करने में परेशानी हो रही है। हालांकि, आयोग की इस प्रणाली में आई दिक्कत का मतदाताओं के वोट डालने की प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका नहीं है।
हैकर्स की कोशिशों के बाद बंद करनी पड़ीं ऑनलाइन सेवाएं
संघीय चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि उसकी इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग प्रणाली फिलहाल ऑफलाइन है और तकनीकी कर्मचारी सेवा बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग के एक इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग अधिकारी ने सोमवार रात चुनावी अभियानों से जुड़े अनुपालन संबंधी कार्य करने वाली कंपनियों को ईमेल भेजा था।
ईमेल में बताया गया कि आयोग के सिस्टम में सेंध लगाने की लगातार कोशिशें हो रही हैं। इसी वजह से वेब आधारित सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। आयोग ने यह भी कहा कि तकनीकी समस्या की पहचान कर ली गई है और उसे दूर करने का काम जारी है।
चुनावी खर्च का ब्योरा दाखिल करने में आ रही परेशानी
फाइलिंग प्रणाली ठप होने से राजनीतिक संगठनों और चुनावी समितियों के लिए 24 घंटे और 48 घंटे के भीतर दाखिल की जाने वाली अनिवार्य चुनावी खर्च रिपोर्ट जमा करना मुश्किल हो गया है। चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में यह व्यवधान ऐसे समय आया है, जब राजनीतिक दल और सुपर पीएसी चुनावी अभियानों पर बड़े पैमाने पर खर्च कर रहे हैं।
हालांकि, आयोग की वेबसाइट पर पहले से दाखिल की जा चुकी रिपोर्टों को खोजने की सुविधा उपलब्ध है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती नई रिपोर्टों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जमा करने की है।
क्या वोटिंग पर पड़ेगा साइबर हमले का असर?
संघीय चुनाव आयोग का मुख्य काम उम्मीदवारों और राजनीतिक समितियों के चुनावी खर्च, चंदे और वित्तीय रिपोर्टिंग से जुड़े नियमों की निगरानी करना है। अमेरिका में मतदान कराने और मतों की गिनती की जिम्मेदारी इस आयोग की नहीं है।
इसी वजह से फाइलिंग प्रणाली में आई तकनीकी बाधा से मतदान प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका नहीं जताई गई है। हालांकि, चुनावी वित्तीय जानकारी दाखिल करने में देरी राजनीतिक संगठनों और चुनावी अभियानों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है।
ट्रंप के लिए अहम है 3 नवंबर का चुनाव
अमेरिका में होने वाला मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस चुनाव से तय होगा कि रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस में अपना बहुमत बरकरार रख पाती है या नहीं। इसका असर राष्ट्रपति के शेष कार्यकाल में विधायी एजेंडे और नीतियों को आगे बढ़ाने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।
चुनाव से पहले ट्रंप चुनावी ईमानदारी का मुद्दा उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा है कि यदि चुनाव निष्पक्ष तरीके से होते हैं, तो वह नतीजों का सम्मान करेंगे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने अपनी वीटो शक्ति का भी जिक्र किया और कहा कि जरूरत पड़ने पर वह इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
मतदाता धोखाधड़ी की जानकारी देने पर 10 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले चुनावों या आगामी 2026 के मध्यावधि चुनावों से संबंधित मतदाता धोखाधड़ी के मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी और दोषसिद्धि में मददगार जानकारी देने वाले लोगों के लिए 10 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा की थी।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा था कि मतदाता धोखाधड़ी की जानकारी देने वाले व्यक्ति को संबंधित आरोपियों की गिरफ्तारी और दोषसिद्धि होने पर यह राशि दी जाएगी। यह घोषणा चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच सामने आई थी।
प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर होगा चुनाव
3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर मतदान होगा। इसके साथ ही सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए भी चुनाव कराया जाएगा।
इन चुनावों के परिणाम से वॉशिंगटन में राजनीतिक शक्ति का संतुलन तय होगा। कांग्रेस के दोनों सदनों में किस पार्टी का नियंत्रण रहता है, इसका असर सरकार की नीतियों, कानून बनाने की प्रक्रिया और राष्ट्रपति के एजेंडे पर पड़ सकता है।
सर्वे में महंगाई और अर्थव्यवस्था को बताया गया प्रमुख मुद्दा
सीबीएस न्यूज के रविवार को प्रकाशित सर्वे के मुताबिक, प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी को 229 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। हालांकि, यह सर्वे आधारित अनुमान है, चुनाव का अंतिम परिणाम नहीं। रिपब्लिकन पार्टी के लिए सदन में नियंत्रण बनाए रखने की संभावना भी सर्वे में पूरी तरह समाप्त नहीं मानी गई।
सर्वे में महंगाई और व्यापक आर्थिक चिंताओं को अमेरिकियों के प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल बताया गया। इसके अलावा, मतदान को लेकर मतदाताओं की प्रतिबद्धता में भी अंतर सामने आया। अधिक डेमोक्रेटिक मतदाताओं ने कहा कि वे मतदान करने का फैसला कर चुके हैं या पहले ही वोट डाल चुके हैं, जबकि कम प्रतिबद्ध मतदाताओं के बीच रिपब्लिकन पार्टी की ओर झुकाव दर्ज किया गया।
ऐसे में मतदान प्रतिशत और मतदाताओं की भागीदारी चुनाव के नतीजों में अहम भूमिका निभा सकती है। चुनाव से कुछ दिन पहले संघीय चुनाव आयोग की ऑनलाइन फाइलिंग प्रणाली में आया व्यवधान भी राजनीतिक गतिविधियों के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है।
