नई दिल्ली। देश में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 9,072 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन अहम रेलवे परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इन परियोजनाओं के जरिए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के कुल 8 जिलों में रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और करीब 307 किलोमीटर तक भारतीय रेल नेटवर्क का विस्तार होगा।
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से यात्री और माल परिवहन दोनों को बड़ा फायदा होगा, साथ ही परिचालन क्षमता और गति में भी सुधार आएगा।
इन तीन परियोजनाओं को मिली मंजूरी
कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर सेक्शन के दोहरीकरण और पुनारख-किउल तथा गम्हरिया-चांडिल सेक्शन पर तीसरी-चौथी रेल लाइन बिछाने को मंजूरी दी है।
गोंदिया-जबलपुर डबल लाइन (231 किमी) परियोजना लगभग 5,236 करोड़ रुपये की लागत से पांच साल में पूरी की जाएगी। यह मार्ग गोंदिया को हावड़ा-मुंबई हाई डेंसिटी नेटवर्क से जोड़ेगा, जबकि जबलपुर को इटारसी-वाराणसी रूट से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
पुनारख-किउल तीसरी-चौथी लाइन (50 किमी) करीब 2,268 करोड़ रुपये की लागत से तीन साल में तैयार होगी। इससे बिहार के पटना और लखीसराय जिलों को सीधा लाभ मिलेगा और ट्रैफिक दबाव कम होगा।
गम्हरिया-चांडिल तीसरी-चौथी लाइन (26 किमी) 1,168 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाएगी। इससे झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में रेल सेवाओं का विस्तार होगा और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
5400 से अधिक गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार के मुताबिक इन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 5,407 गांवों की कनेक्टिविटी सुधरेगी। इन क्षेत्रों में करीब 98 लाख लोग निवास करते हैं। लाइन क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की आवाजाही सुचारु होगी, देरी में कमी आएगी और परिचालन दक्षता बेहतर होगी।
पर्यटन और माल ढुलाई को मिलेगा बढ़ावा
इन परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। जबलपुर का Kachnar City Shiv Temple, Kanha National Park, Dhuandhar Falls, झारखंड का Chandil Dam और Dalma Wildlife Sanctuary जैसे आकर्षण स्थलों तक आवागमन और आसान होगा।
साथ ही यह रेल मार्ग कोयला, स्टील, सीमेंट, खाद, खाद्यान्न और पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई के लिए भी अहम माना जा रहा है। क्षमता विस्तार के बाद करीब 52 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल परिवहन संभव होगा, जिससे औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा।
पर्यावरण और रोजगार पर सकारात्मक असर
रेल मंत्रालय के अनुसार ये परियोजनाएं PM Gati Shakti National Master Plan के तहत तैयार की गई हैं। इससे लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और सालाना करीब 6 करोड़ लीटर तेल आयात घटेगा। अनुमान है कि लगभग 30 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ के समान है।
सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।
