लखनऊ। पीजीआई लखनऊ के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने शुगर नियंत्रित करने वाली एक दवा से हृदय रोगियों का वजन तेजी से कम होने का दावा किया है। डॉक्टरों के अनुसार इस दवा के इस्तेमाल से हार्ट मरीजों का वजन 15 प्रतिशत तक घटाया जा सका है। एक मामले में 125 किलोग्राम वजन वाले हृदय रोगी का वजन महज तीन महीनों में 17 किलो कम हुआ है। पीजीआई लखनऊ के कार्डियोलॉजी विभाग में इलाज करा रहे अधिक वजन वाले 20 हृदय रोगियों की सहमति से इस दवा का ट्रायल किया गया। ट्रायल के नतीजों में पाया गया कि दवा के नियमित उपयोग से मरीजों का वजन 5 से 10 किलोग्राम तक कम हुआ।
कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि यह सेमाग्लूटाइड नाम की दवा है, जो इंजेक्शन के रूप में दी जाती है। यह एक विदेशी दवा है, जिसका उपयोग आमतौर पर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट टाइप-2 मधुमेह के मरीजों में शुगर कंट्रोल करने के लिए करते हैं। उन्होंने बताया कि यह दवा शरीर में हार्मोन की तरह काम करती है, जिससे भूख कम लगती है और वजन नियंत्रित रहता है। डॉ. नवीन गर्ग के अनुसार, यह दवा केवल शुगर के मरीजों तक सीमित नहीं है। ट्रायल में शामिल कई मरीज ऐसे थे, जिन्हें डायबिटीज नहीं थी, फिर भी दवा उनके लिए प्रभावी साबित हुई। मोटापे से ग्रस्त हृदय रोगियों को सप्ताह में एक बार यह इंजेक्शन दिया गया।
तीन महीने तक चले ट्रायल में 125 किलो से अधिक वजन वाले एक हार्ट मरीज समेत कुल 20 मरीज शामिल थे। सबसे अधिक वजन उसी मरीज का 17 किलो घटा, जबकि बाकी 19 मरीजों का वजन 5 से 10 किलो तक कम हुआ। डॉ. गर्ग ने बताया कि फिलहाल इस दवा पर हर महीने लगभग 12 हजार रुपये का खर्च आता है। हालांकि, मार्च महीने में इसका पेटेंट खत्म हो जाएगा। इसके बाद देश की फार्मा कंपनियों द्वारा निर्मित यह दवा करीब दो हजार रुपये में उपलब्ध हो सकेगी। डॉक्टरों के अनुसार, ट्रायल के सकारात्मक नतीजों के बाद कई अन्य मरीजों ने भी इस दवा के इस्तेमाल के लिए सहमति जताई है।
