नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान संघर्ष के बीच अमेरिका अपनी सैन्य भर्ती प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। प्रस्ताव के तहत योग्य पुरुष नागरिकों का ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, जिससे जरूरत पड़ने पर उन्हें सेना में अनिवार्य भर्ती (ड्राफ्ट) के लिए चुना जा सकेगा।
वियतनाम युद्ध के बाद सबसे बड़ा बदलाव
यह बदलाव वियतनाम युद्ध के बाद अमेरिकी सैन्य भर्ती प्रणाली में सबसे अहम सुधार माना जा रहा है। उस समय आखिरी बार अनिवार्य भर्ती लागू की गई थी। नई व्यवस्था के तहत 18 से 26 वर्ष की उम्र के पुरुषों का ‘सेलेक्टिव सर्विस’ में स्वतः पंजीकरण किया जाएगा।
किन लोगों पर लागू होगा नियम
नए प्रस्ताव के अनुसार यह प्रणाली अमेरिकी नागरिकों के साथ-साथ ग्रीन कार्ड धारकों, शरणार्थियों, शरण चाहने वालों और बिना दस्तावेज वाले पुरुषों पर भी लागू होगी। हालांकि कुछ श्रेणियों के वीजा धारकों को इससे छूट दी गई है।
कानून में पहले से है प्रावधान, कई राज्यों में लागू ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन
रिपोर्ट्स के मुताबिक कई अमेरिकी राज्यों में पहले से ही ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू है। यह प्रस्ताव नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट के तहत लाया गया था, जिस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दिया था।
ड्राफ्ट प्रक्रिया कैसे होगी तय
सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम के तहत ड्राफ्ट से पहले कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। इसके बाद लॉटरी सिस्टम के जरिए चयन किया जाएगा, जिसमें जन्मतिथि और नंबर के आधार पर भर्ती तय होगी। सबसे पहले 20 वर्ष के युवाओं को बुलाया जाएगा, इसके बाद अन्य आयु वर्ग क्रम से शामिल होंगे।
रजिस्ट्रेशन न करने पर सख्त सजा का प्रावधान
इस सिस्टम में रजिस्ट्रेशन न करना गंभीर अपराध माना जाएगा। इसके चलते स्टूडेंट लोन, सरकारी नौकरी और अन्य लाभों से वंचित किया जा सकता है। साथ ही पांच साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान भी मौजूद है।
ड्राफ्ट के बाद छूट और मेडिकल जांच का प्रावधान
चयनित युवाओं को छूट या स्थगन के लिए आवेदन करने का अधिकार होगा। अंतिम चरण में शारीरिक, मानसिक और नैतिक मूल्यांकन के बाद योग्य उम्मीदवारों को सैन्य सेवा के लिए चुना जाएगा।
