लखनऊ। राजधानी के आशियाना इलाके में सामने आए सनसनीखेज हत्याकांड ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। शहर के नामी कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि उनके इकलौते बेटे अक्षत सिंह ने कर दी। हत्या के बाद शव को नीले ड्रम में छिपाकर गुमशुदगी की कहानी गढ़ी गई, लेकिन बदलते बयानों ने पूरा राज खोल दिया।
पढ़ाई को लेकर बढ़ता गया तनाव
मानवेंद्र सिंह आशियाना में परिवार के साथ रहते थे। पत्नी के निधन के बाद वह बेटे अक्षत और बेटी कृति के साथ रह रहे थे। आर्थिक रूप से संपन्न परिवार के मुखिया मानवेंद्र के पास चार पैथोलॉजी लैब और तीन शराब की दुकानें थीं। उनकी इच्छा थी कि बेटा डॉक्टर बने। अक्षत ने प्रतिष्ठित लामार्ट स्कूल से 12वीं की पढ़ाई की और कोचिंग संस्थान से नीट की तैयारी भी की। उसने दो बार परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद वह परिवार के कारोबार में रुचि लेने लगा।
इसी बात को लेकर पिता-पुत्र के बीच मतभेद गहराते गए। जहां पिता मेडिकल प्रोफेशन में भविष्य देख रहे थे, वहीं बेटा बिजनेस संभालना चाहता था। यह मतभेद धीरे-धीरे बहस और फिर गंभीर विवाद में बदल गया।
चोरी के बाद बढ़ी निगरानी
करीब चार महीने पहले घर से कीमती गहनों की चोरी हुई थी। जांच में सामने आया कि जेवर और पैसे अक्षत ने ही लिए थे। इसके बाद मानवेंद्र बेटे की गतिविधियों पर नजर रखने लगे थे। बताया जाता है कि 20 फरवरी को इसी तनाव के बीच दोनों के बीच तीखा विवाद हुआ।
लाइसेंसी राइफल से हत्या, फिर रची साजिश
विवाद के दौरान अक्षत ने लाइसेंसी राइफल से पिता को गोली मार दी। मानवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। गोली की आवाज सुनकर बेटी कमरे में पहुंची तो दृश्य देख सन्न रह गई।
हत्या के बाद अक्षत ने शव को तीसरी मंजिल से नीचे घसीटा। बाजार से आरी खरीदकर लाया और हाथ-पैर काट दिए। कटे अंगों को कार में रखकर पारा के सदरौना इलाके में फेंक आया। धड़ को ठिकाने लगाने में असफल रहने पर उसने एक नीला ड्रम खरीदा और उसमें शव को भर दिया।
गुमशुदगी की कहानी, लेकिन खुल गया राज
अक्षत ने आसपास और परिचितों को बताया कि पिता दिल्ली गए हैं और उनका मोबाइल बंद है। लेकिन पुलिस की दोबारा पूछताछ में उसके बयान बदलने लगे। सख्ती से पूछताछ करने पर पूरी साजिश का खुलासा हो गया।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, यह मामला पारिवारिक तनाव और महत्वाकांक्षाओं के टकराव की भयावह परिणति के रूप में सामने आ रहा है।
