पूर्वांचल एक्सप्रेसवे हादसे के बाद एक्शन मोड में सरकार, अन्य राज्यों से आने वाली बसों की सख्त जांच के आदेश

यूपी के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण हादसे के बाद परिवहन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। अब अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने वाली सभी बसों की विशेष जांच होगी। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिस क्षेत्र में यात्री वाहन से दुर्घटना होगी, वहां के जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई तय मानी जाएगी।

आयुक्त ने हादसे का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया दुर्घटनाग्रस्त बस की बॉडी निर्धारित कोड मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। आपातकालीन द्वार के सामने सीट लगाना स्पष्ट रूप से बस बॉडी कोड का उल्लंघन है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मानकों का हर हाल में पालन सुनिश्चित किया जाए और भविष्य में किसी प्रकार की अनदेखी न हो। अनुमन्य संख्या से अधिक सवारियां बैठाने और अन्य मानकों की अवहेलना करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

43 चालान के बाद भी दौड़ती रही ‘मौत की बस’

हादसे का शिकार हुई बस संख्या एचआर-55-एफ-1323 के रिकॉर्ड ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले पांच वर्षों में इस बस का कुल 73 बार चालान किया जा चुका है, जिनमें से 43 चालान केवल उत्तर प्रदेश में हुए। इसके बावजूद न तो बस का पंजीकरण निलंबित किया गया और न ही चालक का ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड हुआ।

प्रदेश में पांच या उससे अधिक बार चालान होने पर वाहन का पंजीकरण और चालक का लाइसेंस निलंबित करने के स्पष्ट निर्देश हैं। जानकारी के अनुसार, लखनऊ आरटीओ अब तक 10 से अधिक वाहनों के पंजीकरण और उनके चालकों के डीएल निलंबित कर चुका है, लेकिन इस बस के मामले में ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

2019 में गुरुग्राम में हुआ था पंजीकरण

बस का पंजीकरण 14 मार्च 2019 को हरियाणा के गुरुग्राम स्थित आरटीओ कार्यालय में प्रदीप कुमार के नाम दर्ज हुआ था। तब से अब तक उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, जयपुर, दिल्ली और बिहार में मोटर व्हीकल एक्ट और सेल्स टैक्स अधिनियम के तहत 73 बार चालान किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि बस मालिक ने जुर्माना भरते हुए 50 चालानों का निस्तारण करा लिया, जबकि शेष चालान लंबित हैं।

हैरानी की बात यह है कि यह बस उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, अयोध्या और बिहार के विभिन्न शहरों के बीच लगातार संचालित होती रही। प्रदेश में 43 से अधिक बार चालान के बावजूद किसी भी आरटीओ कार्यालय ने पांच से अधिक चालान के आधार पर पंजीकरण निलंबन की प्रक्रिया शुरू नहीं की। परिणामस्वरूप, चालान पर चालान होने के बावजूद बस बेखौफ सड़कों पर दौड़ती रही।

लखनऊ में 27 बार कटा चालान

बस के खिलाफ सबसे अधिक कार्रवाई लखनऊ क्षेत्र में दर्ज हुई। 43 में से 27 चालान लखनऊ आरटीओ क्षेत्र में किए गए। शहीद पथ, ट्रांसपोर्ट नगर, गोसाईगंज, किसान पथ, रायबरेली रोड, जुनैबगंज, सरोजनी नगर, नरौना, देहवा, औरंगाबाद खास, मानसरोवर योजना सेक्टर ओ, मोहारीखुर्द और आगरा एक्सप्रेसवे जैसे स्थानों पर चालान दर्ज किए गए।

इसके अलावा गोरखपुर, गाजियाबाद, सहारनपुर, आजमगढ़, नोएडा, आगरा, कानपुर और अयोध्या क्षेत्रों में भी बस का चालान किया गया।

बिहार के सुपौल में सबसे बड़ा जुर्माना

73 चालानों के तहत अब तक कुल 17,62,148 रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। इनमें सबसे बड़ा एकमुश्त जुर्माना बिहार के सुपौल में लगाया गया, जो 2,29,500 रुपये का था। यह कार्रवाई सेल्स टैक्स अधिनियम के उल्लंघन में की गई थी।

हादसे के बाद परिवहन विभाग के सख्त रुख से साफ है कि अब नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन संचालकों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही तय होगी।

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