अयोध्या: चैत्र शुक्ल नवमी के पावन अवसर पर पूरे देश में रामनवमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर अयोध्या में भव्य आयोजन के बीच दोपहर ठीक 12 बजे रामलला के माथे पर सूर्य की किरणों से विशेष सूर्य तिलक किया गया। यह दिव्य दृश्य करीब 4 मिनट तक बना रहा, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वर्चुअल माध्यम से रामलला के दर्शन किए।
सूर्य तिलक के पीछे वैज्ञानिकों की महीनों की मेहनत
रामलला के सूर्य तिलक को साकार करने के लिए वैज्ञानिकों ने लंबा शोध और परीक्षण किया है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स ने सूर्य की गति और किरणों के कोण का गहन अध्ययन किया, जबकि रुड़की स्थित सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में इस पूरी प्रणाली को विकसित किया। बाद में बेंगलुरु की एक संस्था द्वारा मंदिर में हाईटेक उपकरण स्थापित किया गया, जिसमें दर्पण और लेंस के जरिए सूर्य की किरणों को ठीक समय पर रामलला के मस्तक तक पहुंचाया गया।
सूर्य तिलक के बाद हुई भव्य महाआरती
रामनवमी के अवसर पर सुबह से ही रामलला के जन्मोत्सव की धार्मिक प्रक्रियाएं शुरू हो गई थीं। सबसे पहले प्रभु का पंचामृत और सरयू जल से अभिषेक किया गया, इसके बाद उन्हें विशेष वस्त्र और आभूषण पहनाए गए। दोपहर में सूर्य तिलक के तुरंत बाद भव्य महाआरती का आयोजन हुआ। इस पूरे कार्यक्रम को लेकर पहले से व्यापक तैयारियां की गई थीं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, ड्रोन से निगरानी
अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
देशभर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल
रामनवमी चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन होता है, जिसे पूरे देश में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और सात्विक जीवनशैली का पालन करते हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जा रहा है। अयोध्या में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे भगवान राम की जन्मस्थली माना जाता है।
