अखिलेश यादव पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का तीखा हमला, तुष्टीकरण और कानून व्यवस्था को लेकर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लंबी पोस्ट लिखकर सपा प्रमुख की राजनीति और कार्यशैली पर कई सवाल उठाए।

‘वंशवाद से शुरुआत करने वाले संघर्ष नहीं समझ सकते’

डिप्टी सीएम ने अपने पोस्ट में कहा कि बिना जमीनी संघर्ष के वंशानुक्रम से सत्ता में आने वाले नेता यह नहीं समझ सकते कि एक साधारण परिवार से निकलकर पहचान बनाना कितना कठिन होता है। उन्होंने अखिलेश यादव की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाते हुए इसे अपरिपक्व और प्रतिक्रियावादी करार दिया।

तुष्टीकरण की राजनीति का लगाया आरोप

ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख तुष्टीकरण की राजनीति में इतने आगे बढ़ गए हैं कि वे हिंदुओं से दूर हो गए हैं। उन्होंने दीपावली और ईद को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि समाज को बांटकर राजनीति करने वालों को दूसरों पर उंगली उठाने का अधिकार नहीं है।

पीडीए की परिभाषा पर उठाए सवाल

डिप्टी सीएम ने अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को लेकर सपा की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए कई उदाहरण दिए और कहा कि इन वर्गों के सम्मान के मुद्दे पर सपा का रुख स्पष्ट नहीं रहा है।

कानून व्यवस्था और विकास को लेकर भी घेरा

ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश ने पहले वह दौर भी देखा है जब कानून व्यवस्था कमजोर थी और भ्रष्टाचार चरम पर था। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार में स्थिति बदली है और कानून का राज स्थापित हुआ है। अपराधियों पर सख्त कार्रवाई हो रही है और विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

भाजपा सरकार की उपलब्धियां गिनाईं

डिप्टी सीएम ने अपनी पोस्ट में भाजपा सरकार की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के सम्मान के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

जनता पर छोड़ा अंतिम फैसला

अपने बयान के अंत में ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार का फोकस साफ है—काम करना, सेवा करना और जनता के विश्वास पर खरा उतरना। उन्होंने कहा कि अफवाहों और दुष्प्रचार से सच्चाई नहीं बदलती और अंत में फैसला जनता ही करती है।

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