Chatra Plane Crash: 10 साल पहले नजफगढ़ एयर एंबुलेंस हादसे जैसी दहला देने वाली त्रासदी, जानें 2016 में कैसे टला था बड़ा हादसा

नई दिल्ली। झारखंड के चतरा में हुए भीषण प्लेन क्रैश ने देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में एयर एंबुलेंस में सवार सभी 7 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 2 क्रू मेंबर और 5 यात्री शामिल थे। विमान एक गंभीर रूप से झुलसे मरीज को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली लेकर आ रहा था, लेकिन मंजिल तक पहुंचने से पहले ही वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस त्रासदी ने साल 2016 में दिल्ली के नजफगढ़ में हुई एक ऐसी ही घटना की याद ताजा कर दी है, जब एयर एंबुलेंस के दोनों इंजन फेल हो गए थे।

2016 में नजफगढ़ में क्या हुआ था?

साल 2016 में एक एयर एंबुलेंस पटना से दिल्ली आ रही थी। विमान में एक डॉक्टर, एक तकनीशियन, हृदय रोगी वीरेंद्र राय और चालक दल समेत कुल 7 लोग सवार थे। दिल्ली एयरपोर्ट के रनवे के करीब पहुंचते समय विमान के दोनों इंजन एक के बाद एक फेल हो गए थे। हालात बेहद गंभीर हो चुके थे।

उस वक्त पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ इलाके के कैर गांव में एक खुले मैदान में आपातकालीन लैंडिंग का फैसला लिया। पायलट की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया। इस दुर्घटना में किसी की मौत नहीं हुई थी, हालांकि दो लोग घायल हुए थे।

चतरा में कैसे हुआ हादसा?

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के मुताबिक, रेडबर्ड एविएशन का एयर एंबुलेंस विमान, बीचक्राफ्ट किंग एयर BE9L, रांची से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद झारखंड के चतरा जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान ने शाम 7 बजकर 11 मिनट पर उड़ान भरी थी और 7 बजकर 34 मिनट पर कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क स्थापित किया था।

खराब मौसम के चलते पायलटों ने मार्ग बदलने का अनुरोध किया था। इसके कुछ ही मिनटों बाद वाराणसी से लगभग 100 समुद्री मील दक्षिण-पूर्व में विमान का रडार और संचार संपर्क टूट गया। अधिकारियों के अनुसार, विमान संभवतः तूफान की चपेट में आकर घने जंगल में गिर गया।

घने जंगल में गिरा विमान, कोई नहीं बचा

दुर्घटनास्थल चतरा जिले के घने जंगल में स्थित था। बचाव दल को शवों को करीब दो किलोमीटर तक पैदल ले जाना पड़ा। जब रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची, तब तक सभी सात लोगों की मौत हो चुकी थी।

विमान में दो चालक दल के सदस्य, एक मरीज और उसके परिवार के चार सदस्य सवार थे। मरीज संजय, लातेहार जिले के चंदवा का निवासी था। वह एक होटल में शॉर्ट सर्किट की घटना में गंभीर रूप से झुलस गया था। साधारण पृष्ठभूमि वाले परिवार ने दिल्ली के Sir Ganga Ram Hospital में इलाज के लिए कर्ज लेकर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की थी।

मृतकों में संजय की पत्नी अर्चना, रिश्तेदार ध्रुव, अस्पताल का एक कर्मचारी और दोनों पायलट शामिल हैं। मामले की जांच अब विमान दुर्घटना जांच शाखा द्वारा की जा रही है। साथ ही विमान संचालक के सुरक्षा रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जा रही है।

2016 और 2026 की घटनाओं में चौंकाने वाली समानताएं

दोनों घटनाओं में एयर एंबुलेंस शामिल थी।
दोनों विमानों में सात-सात लोग सवार थे।
दोनों ही बीचक्राफ्ट किंग एयर विमान थे।
दोनों मामलों में मरीजों को तत्काल चिकित्सा उपचार के लिए ले जाया जा रहा था।
दोनों ही घटनाओं में उड़ान के दौरान गंभीर तकनीकी या मौसम संबंधी आपात स्थिति उत्पन्न हुई।

चतरा का यह हादसा एक बार फिर एयर एंबुलेंस सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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