नेपाल में हाल ही में हुए संसदीय चुनाव के अंतिम नतीजे सामने आने के साथ ही देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 165 में से 125 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। किसी नई पार्टी की यह ऐतिहासिक जीत मानी जा रही है, जिसने पारंपरिक राजनीतिक दलों की पकड़ को चुनौती दे दी है।
चुनाव परिणामों के बाद अब नेपाल में नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और पार्टी के वरिष्ठ नेता बालेंद्र शाह को प्रधानमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
युवाओं के बीच तेजी से बढ़ी लोकप्रियता
35 वर्षीय बालेंद्र शाह पहले एक रैपर के रूप में पहचान रखते थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने राजनीति में तेजी से अपनी जगह बनाई है। साफ छवि और नए विचारों के कारण उन्हें खासकर युवाओं के बीच काफी समर्थन मिला है।
हाल के चुनावों में उनकी पार्टी की भारी जीत के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि वे देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो वे नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्रियों में शामिल होंगे। साथ ही उन्हें देश के पहले मधेसी मूल के प्रधानमंत्री के रूप में भी देखा जा रहा है, जो नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा सकता है।
भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करने का संकेत
बालेंद्र शाह ने चुनाव परिणामों के बाद भारत और नेपाल के रिश्तों को और मजबूत बनाने की बात कही है। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और घनिष्ठ संबंध रहे हैं और आने वाले समय में इन्हें और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनके नेतृत्व में नई सरकार बनती है तो भारत और नेपाल के बीच व्यापार, निवेश और सीमा से जुड़े सहयोग के क्षेत्रों में नए कदम उठाए जा सकते हैं।
कब होगा नए प्रधानमंत्री का फैसला
नेपाल के चुनाव आयोग के अनुसार अंतिम चुनाव परिणाम 15 से 16 मार्च के बीच राष्ट्रपति को सौंपे जाने की संभावना है। इसके बाद 19 मार्च को राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी अपने संसदीय दल की बैठक करेगी।
इसी बैठक में संसदीय दल का नेता चुना जाएगा, जो नेपाल का अगला प्रधानमंत्री बनेगा। सूत्रों के मुताबिक यदि प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ती है तो 20 या 21 मार्च को नए प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण हो सकता है।
नेपाल की राजनीति में बदलाव का संकेत
इस चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की बड़ी जीत को नेपाल की जनता की बदलाव की इच्छा के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से स्थापित दलों के बीच चल रही राजनीति के बीच एक नई पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलना देश की राजनीतिक दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
