मौनी अमावस्या पर चित्रकूट देव गंगा मंदाकिनी में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

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मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धालुओं ने लगाई कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा

चित्रकूट। विश्व प्रसिद्ध पौराणिक तीर्थ के रूप में विख्यात भगवान श्री राम की तपोभूमि चित्रकूट में मौनी अमावस्या के अवसर पर देश भर से लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड के बावजूद, धर्मनगरी में लाखों श्रद्धालुओं ने देव गंगा मंदाकिनी में आस्था की डुबकी लगाने के बाद भगवान श्री कामतानाथ सरकार के दर्शन पूजन कर सुख, समृद्धि की कामना की।

अनादि तीर्थ के रूप में विख्यात तपोभूमि चित्रकूट में मौनी अमावस्या पर्व का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर मंदाकिनी के रामघाट पर हनुमान जी के सहयोग से गोस्वामी तुलसीदास जी को भगवान श्री राम और अनुज लक्ष्मण के दर्शन हुए थे। तभी से मौनी अमावस्या पर प्रभु के दर्शन की कामना को लेकर देश भर से लाखों श्रद्धालु चित्रकूट पहुंचते हैं।

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श्रद्धालुओं का चित्रकूट आगमन शनिवार देर शाम से ही शुरू हो गया था। रविवार भाेर से ही रामघाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। देव गंगा मंदाकिनी के अमृत जल में आस्था का स्नान करने के बाद लोगों ने घाट पर बैठे पुरोहितों को अन्न, वस्त्र और तिल का दान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।स्नान के पश्चात लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान मत्यगजेंद्र नाथ का जलाभिषेक किया और भगवान श्री कामतानाथ के मंदिर में माथा टेककर कामदगिरि पर्वत की ओर बढ़ चले।

पांच कोस की इस परिक्रमा मार्ग पर जय कामतानाथ और जय श्री राम के जयकारे गूंजते रहे। रामघाट और कामदगिरि परिक्रमा पर उमड़ी भीड़ को देखते हुए चित्रकूट जिला प्रशासन ने मेला परिक्षेत्र में सुरक्षा आदि के कड़े इंतजाम किए थे। भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था, ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन में असुविधा न हो।

चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह और अपर पुलिस अधीक्षक सत्यपाल सिंह ने फोर्स के साथ रामघाट और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और पुलिस कर्मियाें काे सतर्कता के साथ ड्यूटी करने और श्रद्धालुओं के साथ विनम्र बर्ताव करने की हिदायत दी।

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कामदगिरि प्रमुख द्वार के महंत डॉ मदन गोपाल दास जी महाराज, दिगंबर अखाड़ा के महंत दिव्य जीवन दास महाराज, तोता मुखी हनुमान मंदिर के महंत मोहित दास महाराज ने बताया कि चित्रकूट विश्व का सबसे प्राचीन तीर्थ है। यह विश्व की इकलौती ऐसी भूमि है जहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं ने लीला की है। भगवान श्री राम ने भी वनवास काल का सर्वाधिक समय व्यतीत करने के लिए चित्रकूट की ही पावन धारा को चुना।

उन्होंने कहा कि चित्रकूट में प्रभु श्री राम, माता सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ सदा निवास करते हैं। जिसका गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में भी वर्णन किया है। इतना ही नहीं मौनी अमावस्या के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास जी को हनुमान जी के सहयोग से रामघाट में भगवान श्री राम के दर्शन हुए थे।

इसी वजह से चित्रकूट में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है। मंदाकिनी गंगा में स्नान कर कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा लगाने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है।आपको बता दें कि माैनी अमवस्या के पावन पर्व पर मंदाकिनी गंगा के अलावा भरतकूप में स्नान का विशेष महत्व दिखा।

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