देवघर की अद्भुत परंपरा! बाबा बैद्यनाथ से पहले क्यों होता है मां काली का श्रृंगार? जानिए हृदयपीठ का धार्मिक रहस्य

देवघर: झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में सदियों से चली आ रही एक अनूठी धार्मिक परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जाती है। यहां प्रतिदिन शाम को बाबा बैद्यनाथ का श्रृंगार करने से पहले मां काली का श्रृंगार किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि देवघर शिव और शक्ति के संयुक्त स्वरूप का पवित्र धाम है, इसलिए यहां पूजा की यह विशेष परंपरा आज भी कायम है।

हृदयपीठ होने के कारण निभाई जाती है यह परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवघर वह स्थान है जहां माता सती का हृदय गिरा था। इसी कारण यह स्थल हृदयपीठ और शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां शिव और शक्ति एक साथ विराजमान हैं। इसी वजह से शाम की पूजा में सबसे पहले मां काली का श्रृंगार किया जाता है और उसके बाद बाबा बैद्यनाथ का श्रृंगार होता है।

शिव पुराण में भी मिलता है बैद्यनाथ धाम का उल्लेख

शिव पुराण के अध्याय 38 में बैद्यनाथ धाम का उल्लेख ‘वैद्यनाथं चिताभूमौ’ के रूप में किया गया है। वहीं बृहत्स्तोत्ररत्नाकार और आदि शंकराचार्य की रचनाओं में भी बैद्यनाथ धाम की महिमा का वर्णन मिलता है। इन ग्रंथों में बैद्यनाथ को चिताभूमि में माता गिरिजा के साथ विराजमान बताया गया है, जिनकी देवता और असुर दोनों आराधना करते हैं।

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है बैद्यनाथ धाम

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, बैद्यनाथ धाम भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है। मान्यता है कि यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहां शिव और शक्ति एक साथ विराजमान हैं। इसी कारण यहां की पूजा-पद्धति भी अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग मानी जाती है।

महाशिवरात्रि पर निभाई जाती है विशेष पूजा परंपरा

शिव-शक्ति स्थल होने के कारण महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां चार प्रहर की पूजा के दौरान प्रत्येक प्रहर में जावा फूल के साथ ज्योतिर्लिंग पर सिंदूर अर्पित किया जाता है। यह परंपरा भी देवघर की धार्मिक विशेषताओं में शामिल है और श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है।

श्रृंगार के बाद सभी मंदिरों में होती है धूप-दीप आरती

बाबा मंदिर इस्टेट के पुरोहित श्रीनाथ पंडित के अनुसार, जलार्पण के बाद प्रतिदिन शाम को पहले मां काली का श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद बाबा बैद्यनाथ का श्रृंगार संपन्न होता है। श्रृंगार के उपरांत पुजारी मंदिर परिसर में स्थित सभी 22 मंदिरों में धूप-दीप अर्पित कर आरती करते हैं।

 

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