होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का सख्त रुख बरकरार, पीछे हटने के संकेत नहीं; रणनीतिक और राजनीतिक कारणों से अड़ा तेहरान

तेहरान से सामने आई एक अहम रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान अपने रुख में नरमी दिखाने के मूड में नहीं है। एक प्रमुख थिंक टैंक की स्टडी के मुताबिक, ईरान अब इस मुद्दे पर अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत कर चुका है और अमेरिका के दबाव के बावजूद पीछे हटने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है।

रणनीतिक नियंत्रण छोड़ने को तैयार नहीं ईरान
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य और अपने परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर किसी भी तरह का नियंत्रण छोड़ने के पक्ष में नहीं है। ईरानी नेतृत्व के भीतर यह सोच अब प्रमुख हो गई है कि इन रणनीतिक बिंदुओं पर समझौता करना देश के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ होगा।

अमेरिका की नाकेबंदी हटाना बना मुख्य मुद्दा
ईरान के भीतर राजनीतिक स्तर पर भी एकजुटता बनती दिख रही है। मुख्यधारा के नेताओं का मानना है कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक परमाणु मुद्दे पर किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है। यही रुख ईरानी सैन्य नेतृत्व की प्राथमिकता भी माना जा रहा है।

ओमान के जरिए वैधता की कोशिश
विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की योजना बना सकता है और इसके लिए ओमान को शामिल करने की कोशिश कर रहा है। इस कदम के जरिए ईरान इस क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैध ठहराने की रणनीति बना रहा है, जिससे उसे अमेरिका के साथ बातचीत में बढ़त मिल सके।

हूती विद्रोहियों के जरिए दबाव बनाने की रणनीति
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान, यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के माध्यम से बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों के जरिए अमेरिका पर दबाव बनाने की रणनीति पर विचार कर रहा है। इसके साथ ही संघर्ष विराम के दौरान ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को भी फिर से मजबूत किया है।

अमेरिका का कड़ा रुख, नाकेबंदी जारी रखने के संकेत
दूसरी ओर अमेरिका ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी को प्रभावी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नहीं छोड़ता, तब तक किसी समझौते की संभावना नहीं है।

नाकेबंदी को बताया सबसे असरदार हथियार
हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान पर दबाव बनाने के लिए नाकेबंदी, सैन्य कार्रवाई से भी ज्यादा प्रभावी साबित हो रही है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि अगर ईरान झुकने को तैयार नहीं होता है, तो भविष्य में सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।

तनाव बरकरार, समाधान दूर
कुल मिलाकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हैं, जिससे फिलहाल किसी समाधान की संभावना दूर नजर आ रही है।

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