तेल बेचने के मूड में ट्रंप! वैश्विक संकट के बीच दुनिया को दिया ऑफर, बोले- ‘सबसे बेहतरीन तेल हमारे पास’

वाशिंगटन में चल रही ईरान-अमेरिका शांति वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के तेल बाजार को सीधा संदेश दे दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए अमेरिका के तेल और गैस भंडारों की खुलकर मार्केटिंग की और वैश्विक आयातकों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास न सिर्फ सबसे ज्यादा तेल है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी दुनिया में सबसे बेहतर है।

खाली टैंकरों को अमेरिका बुलाने का दावा

ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकर इस समय खाली हालत में अमेरिका की ओर बढ़ रहे हैं, ताकि उन्हें यहां के “सबसे बेहतरीन” और “सबसे मीठे” तेल व गैस से भरा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास अगले दो सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों को मिलाकर जितना तेल है, उससे भी ज्यादा भंडार मौजूद है और लोडिंग भी बेहद तेजी से की जा सकती है।

वैश्विक अस्थिरता के बीच आया बयान

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय विवादों के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। टैंकरों की आवाजाही पर असर पड़ा है, जिससे कई देशों में मांग बढ़ी है। ऐसे हालात में अमेरिका की ओर टैंकरों का रुख करना उसके बढ़ते निर्यात प्रभाव की ओर इशारा करता है।

उत्पादन में अमेरिका सबसे आगे

आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में अमेरिका ने औसतन 13.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का उत्पादन किया, जो रूस और सऊदी अरब जैसे बड़े उत्पादकों से कहीं अधिक है। अमेरिकी तेल ‘लाइट स्वीट क्रूड’ श्रेणी में आता है, जो आसानी से रिफाइन होता है और पेट्रोल उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। ट्रंप ने इसी गुणवत्ता को अपनी पोस्ट में प्रमुखता से रेखांकित किया।

ऊर्जा नीति के तहत बढ़ रहा दबदबा

ट्रंप प्रशासन लगातार अमेरिका की ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। नई ड्रिलिंग की अनुमति, उत्पादन बढ़ाने और नियमों में ढील जैसी नीतियों के जरिए अमेरिका को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते कई देश अब अमेरिकी तेल पर निर्भरता बढ़ा सकते हैं, जिससे वैश्विक बाजार में स्थिरता आ सकती है।

‘अमेरिका फर्स्ट’ रणनीति का हिस्सा

ट्रंप का यह कदम उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा माना जा रहा है। उनका फोकस साफ है—देश की प्राकृतिक संसाधन क्षमता का अधिकतम उपयोग कर आर्थिक मजबूती हासिल करना और वैश्विक बाजार में अमेरिका की पकड़ को और मजबूत करना।

Related posts