भारत के 6 रहस्यमयी मंदिर: कहीं चूहों की पूजा, कहीं समुद्र में डूबता है शिवालय, तो कहीं बिना तेल जलती है अग्नि!

नई दिल्ली: भारत को मंदिरों की धरती यूं ही नहीं कहा जाता। यहां आस्था के साथ-साथ रहस्य और परंपराओं की ऐसी अनोखी कहानियां जुड़ी हैं, जो पहली बार सुनने पर अविश्वसनीय लगती हैं। देशभर में कई मंदिर अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो अपनी विचित्र मान्यताओं, अनोखी रस्मों और रहस्यमयी घटनाओं के कारण विश्वभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। आइए जानते हैं भारत के 6 ऐसे मंदिरों के बारे में, जिनकी खासियत आपको हैरान कर देगी।

करणी माता मंदिर: जहां चूहों को माना जाता है पवित्र

राजस्थान के बीकानेर के पास देशनोक में स्थित करणी माता मंदिर को दुनिया भर में “चूहों का मंदिर” कहा जाता है। यहां हजारों चूहे खुलेआम घूमते हैं, जिन्हें स्थानीय लोग ‘काबा’ कहकर पूजते हैं। मान्यता है कि ये चूहे करणी माता के भक्तों के पुनर्जन्म हैं। मंदिर में चूहों द्वारा कुतरा गया प्रसाद खाना शुभ माना जाता है। खास तौर पर सफेद चूहा दिखना अत्यंत सौभाग्य का संकेत समझा जाता है। संगमरमर की नक्काशी और चांदी के भव्य दरवाजे इस मंदिर की रहस्यमय आभा को और बढ़ा देते हैं।

बुलेट बाबा मंदिर: मोटरसाइकिल जिसे मानते हैं देवता

राजस्थान के जोधपुर के पास स्थित यह मंदिर एक रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल को समर्पित है। लोककथा के अनुसार ओम सिंह राठौड़ नामक युवक की यहां सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। दुर्घटना के बाद पुलिस जब बाइक को थाने ले गई तो वह रहस्यमयी तरीके से बार-बार उसी स्थान पर वापस पहुंच जाती थी। इसके बाद लोगों ने इसे चमत्कार मानते हुए पूजा शुरू कर दी। आज भी श्रद्धालु सुरक्षित यात्रा की कामना लेकर यहां आते हैं और बाइक के सामने शराब, फूल और अगरबत्ती चढ़ाते हैं।

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर: जो दिन में दो बार समुद्र में समा जाता है

गुजरात के कवि कंबोई गांव में स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यह समुद्र तट पर बना है और दिन में दो बार ज्वार आने पर पूरी तरह पानी में डूब जाता है। भाटा के समय समुद्र का जलस्तर घटने पर मंदिर फिर से दिखाई देता है और श्रद्धालु दर्शन करते हैं। यह दृश्य सृष्टि और विनाश के चक्र का प्रतीक माना जाता है।

कामाख्या मंदिर: जहां देवी की मूर्ति नहीं, प्राकृतिक शक्ति की पूजा

असम के गुवाहाटी में नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या मंदिर भारत के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक है। मान्यता है कि यहां देवी सती का गर्भाशय स्थित है। इस मंदिर में किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि प्राकृतिक योनि-आकृति की आराधना की जाती है। यह स्थल स्त्री शक्ति और सृजन का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष अंबुबाची मेला आयोजित होता है, जो देवी के मासिक धर्म चक्र का प्रतीक है। इस दौरान मंदिर तीन दिनों तक बंद रहता है।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर: भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति का केंद्र

राजस्थान के दौसा जिले में स्थित यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और विशेष रूप से नकारात्मक शक्तियों तथा मानसिक बाधाओं से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। देशभर से लोग यहां विशेष अर्जी और अनुष्ठान कराने पहुंचते हैं। मंदिर का वातावरण अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है, जहां मंत्रोच्चार और विशेष पूजा इसे रहस्यमय आभा प्रदान करते हैं।

ज्वालामुखी मंदिर: बिना दीपक के सदियों से जलती अग्नि

हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में स्थित ज्वालामुखी मंदिर देवी शक्ति को समर्पित है। यहां किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि धरती की दरारों से निकलने वाली प्राकृतिक अग्नि लपटों को देवी का स्वरूप माना जाता है। ये लपटें सदियों से लगातार जल रही हैं और इन्हें लेकर रहस्य आज भी कायम है। यही वजह है कि यह मंदिर सबसे पवित्र और रहस्यमयी शक्ति पीठों में गिना जाता है।

भारत के ये रहस्यमयी मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि परंपरा, संस्कृति और अनजाने रहस्यों का अद्भुत संगम भी हैं। आधुनिक सोच से परे इन मान्यताओं के बावजूद सदियों से लोगों की आस्था इन्हें जीवंत बनाए हुए है। आध्यात्मिकता के साथ रोमांच और रहस्य का अनुभव करना हो तो इन स्थलों की यात्रा अपने आप में एक अलग ही अनुभूति साबित हो सकती है।

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