धनतेरस पर खरीदारी के साथ गाय को पहला निवाला खिलाना क्यों माना जाता है शुभ? जानें धार्मिक मान्यता

नई दिल्ली: धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन और अन्य नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। लेकिन हिंदू धर्म में इस दिन गाय को पहला निवाला खिलाना भी विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गाय को भोजन कराना सेवा, करुणा और पुण्य का प्रतीक है। माना जाता है कि इस दिन गोसेवा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

धनतेरस पर गाय को पहला ग्रास खिलाने की परंपरा

भारतीय परिवारों में लंबे समय से रसोई में बनने वाली पहली रोटी गाय के लिए निकालने की परंपरा रही है। हिंदू संस्कृति में गाय को मातृत्व, पोषण और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से गाय को भोजन कराना धार्मिक दृष्टि से पुण्य का कार्य समझा जाता है।

धनतेरस के दिन इस परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि गाय को पहला ग्रास खिलाने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और परिवार को धन, सुख तथा समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के साथ गोसेवा को भी शुभ कार्य माना जाता है।

गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास होने की मान्यता

सनातन परंपरा में गाय को पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास होता है। इसी विश्वास के आधार पर गाय को भोजन कराना और उसकी सेवा करना देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।

पौराणिक मान्यताओं में मां लक्ष्मी के स्वरूप और गोमाता के बीच भी संबंध बताया गया है। मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर गाय को भोजन कराने से घर में सकारात्मकता, सुख-शांति और समृद्धि आती है। कुछ धार्मिक विश्वासों में इसे कर्ज संबंधी परेशानियों से मुक्ति की कामना से भी जोड़ा जाता है।

धनतेरस पर गाय को क्या खिलाएं?

धार्मिक परंपरा के अनुसार, धनतेरस पर गाय को रोटी या उसके अनुकूल सुरक्षित भोजन खिलाया जा सकता है। भोजन कराते समय श्रद्धा और सेवा भाव रखने पर जोर दिया जाता है। कुछ मान्यताओं में गाय को भोग अर्पित करते समय ‘ॐ सुरभ्यै नमः’ मंत्र का जाप करना भी शुभ माना गया है।

गोसेवा करते समय ध्यान रखना चाहिए कि गाय को ऐसा भोजन ही दिया जाए, जो उसके स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हो। उसे खराब, बासी या नुकसान पहुंचाने वाली चीजें नहीं खिलानी चाहिए।

धार्मिक ग्रंथों में गाय का विशेष महत्व

संस्कृत में गाय के लिए ‘धेनु’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। हिंदू धार्मिक परंपरा में गाय की पूजा और सेवा का उल्लेख मिलता है। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा में कामधेनु नामक दिव्य गाय का वर्णन भी किया गया है, जिसे समृद्धि और इच्छापूर्ति से जोड़ा जाता है।

इन्हीं धार्मिक मान्यताओं के कारण गाय को भोजन कराना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि सेवा, दया और जीवों के प्रति संवेदना व्यक्त करने का तरीका भी माना जाता है। धनतेरस पर खरीदारी और पूजा के साथ गोसेवा करने की परंपरा इसी भावना को महत्व देती है।

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